दोस्त के भाई की शादी में माँ की चुदाई

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प्रेषक : राहुल ..

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम राहुल है और में जयपुर का रहने वाला हूँ और में कामुकता डॉट कॉम को बहुत सालों से पढ़ता आ रहा हूँ और मेरे साथ मेरे दोस्त भी इसकी सेक्सी कहानियों को पढ़ते और बहुत मज़े लेते है। दोस्तों आज में आपको अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ.. जिसको सुनने के बाद आप सभी को बहुत मज़ा आएगा। दोस्तों मेरे दो दोस्त बहुत अच्छे दोस्त थे और हम तीनों साथ साथ घूमते, एक ही स्कूल में जाते और हम तीनों ने इसी साल 12वीं क्लास पास की है.. मेरे दोनों दोस्तों का नाम सुशील और विकास है और हम तीनों साथ में ही बैठकर कई बार इस साईट पर सेक्स स्टोरी पड़ते थे और हम तीनों को ही आंटी के साथ सेक्स वाली स्टोरी बहुत अच्छी लगती थी। फिर हम स्टोरी पड़कर आस पास की आंटी को हमेशा भूखी नजरों से देखते और उनके बारे में बातें करते थे।

दोस्तों यह स्टोरी मेरी माँ और मेरे इन्ही दो दोस्तों की एक सच्ची घटना है और मेरी माँ का नाम उषा है और वो एक हाऊसवाईफ है और एक अच्छी पतिव्रता नारी है और मेरी माँ थोड़ी मोटी है और माँ 36 साईज की ब्रा पहनती है। में और मेरे दोनों दोस्त हमेशा साथ रहते थे और आज भी रहते है.. हम एक दूसरे के घर आते जाते रहते है और हमारे घरवाले हमें बहुत अच्छी तरह से जानते है.. लेकिन हमारे घरवाले एक दूसरे से कभी नहीं मिले और फिर आज से 4 महीने पहले मेरे एक दोस्त विकास के बड़े भाई की शादी थी तो उसने मुझे और सुशील को भी शादी में बुलाया और शादी दूसरे शहर में थी.. जो कि ज्यादा दूर नहीं था.. हमारे 12वीं के पेपर खत्म हो चुके थे और मेरे पापा ने मुझे जाने की इजाजत दे दी.. लेकिन विकास ने मेरे पापा, मम्मी से कहा कि उन्हें भी शादी में आना होगा तो पापा ने बोला कि सॉरी वो तो नहीं आ सकते और फिर विकास ने कहा कि ठीक है लेकिन आंटी तो आ ही सकती है ना और सुशील के मम्मी, पापा भी शादी में आ रहे है तो यह बात सुनकर मैंने भी माँ से आने की ज़िद की.. क्योंकि और हमे दूसरे दिन की शाम को ही आ जाना था तो पापा ने माँ को जाने को बोला तो माँ ने पहले तो साफ मना कर दिया लेकिन फिर मान गई।

फिर शादी में जाने का दिन आया और बारात में जाने के लिए दो बस थी.. हम विकास के घर पहुंचे तो विकास और सुशील ने हमे वेलकम किया और माँ को अपने घर वालो से मिलवाया.. लेकिन मुझे वहाँ पर सुशील के घर वाले नहीं दिखे तो मैंने उससे पूछा तो सुशील बोला कि वो नहीं आये और हम सभी बस में बैठ गए.. मेरे दोनों दोस्त बस में मेरी माँ के पास बैठे और मुझे पास वाली सीट पर बैठा दिया और वो दोनों मेरी माँ से बातें करने लगे और मुझे बहुत अजीब लगा लेकिन मुझे कुछ ग़लत नहीं लगा। फिर हम दो घंटे के बाद शादी की जगह यानी दूसरे शहर में पहुंच गये और हमारे रुकने का इंतज़ाम एक गेस्ट हाउस में था.. विकास ने मेरी माँ का और सुशील के लिए एक ही रूम में इंतज़ाम किया था और प्रोग्राम स्टार्ट होने में थोड़ी देर थी तो हम सब आराम करने लगे और फिर थोड़ी देर बाद माँ ने हम दोनों को तैयार होने को कहा.. हम तैयार हुए और बाहर चले गये तो हम दोनों के जाने के बाद माँ भी तैयार होने लगी और जब माँ बाहर आई तो वो नीले कलर की साड़ी में बहुत सुंदर लग रही थी.. दोनों हाथों में चूड़ियां थी.. माथे पर सिंदूर और गहनों में बहुत ही सुंदर लग रही थी। सुशील तो मेरी माँ को देखता ही रह गया.. माँ के पास आते ही वो माँ से बोला कि वो बहुत सुंदर लग रही है तो माँ ने उसे धन्यवाद कहा और फिर विकास पास में आया.. वो भी माँ को देखता ही रह गया और उसने भी माँ की बहुत तारीफ की और वो हम सबको अपनी फेमिली से मिलवाने अपने साथ ले गया.. माँ उसकी फेमिली वालो के साथ ही रुक गयी और हम तीनों वहाँ से चले गये और शादी के कुछ काम करने लगे। फिर में अंकल के साथ बाहर चला गया.. 30 मिनट बाद जब में बाहर से आया तो विकास और सुशील माँ के पास बैठे हुए थे और बातें कर रहे थे और माँ भी बहुत हंस हंसकर जवाब दे रही थी तो जब में पास पहुंचा तो वो दोनों माँ को बोल रहे थे कि वो आज बहुत ही सुंदर लग रही है और यह साड़ी उन पर बहुत अच्छी लग रही है.. माँ यह बात सुनकर शरमा गई और बोली कि बेटा कितनी बार बोलोगे.. अब तो मुझे शरम आने लगी है। इस बात पर विकास बोला कि आंटी बस रहा नहीं जा रहा.. इसलिए बोल रहा हूँ। तभी थोड़ी देर बाद हम सभी दुल्हन के घर चले गये।

फिर वहाँ पर भी विकास और सुशील मेरी माँ के आस पास ही रहे और उनसे बातें करते रहते या उनके लिए कुछ लाते रहते और रात के 11 बजे तक सब मेहमान चले गये और अब सिर्फ़ फेमिली के लोग ही रह गये थे और फेरे सुबह 4 बजे के थे तो माँ ने कहा कि वो गेस्ट हाउस जाकर आराम करना चाहती है तो मैंने कहा कि में आपको छोड़कर आ जाता हूँ। तभी विशाल ने कहा कि वो भी साथ में चल रहा है.. उसे भी चेंज करना है और फ्रेश होकर वापस आ जाते है हमने विकास को कहा और हम चले गये। हम अभी गेस्ट हाउस पहुंचे ही थे कि विकास के पापा का मुझे कॉल आया और उन्होंने मुझे जल्दी से आने को कहा। फिर जब मैंने माँ से कहा तो माँ ने मुझे जाने को बोल दिया और में वहाँ पर गया तो अंकल ने बताया कि विकास को किसी दूसरे काम से जाना पड़ा.. उसे आने में थोड़ा टाईम लग जाएगा.. इसलिए मुझे कॉल करके बुलाया है और फिर उन्होंने मुझे अपने साथ वहीं पर रुकने को कहा और में भी रुक गया तो 20 मिनट बाद आंटी ने मुझे कहा कि पूजा का कुछ सामान गेस्ट हाउस में रखा हुआ है तो तुम उसे ले आओ और उन्होंने एक आदमी को मेरे साथ भेजने के लिए बुलाया।

फिर मैंने कहा कि वहाँ पर सुशील है और में उसके साथ सामान ले आऊंगा.. आंटी ने ठीक है कह दिया और में गेस्ट हाउस की और चल दिया। फिर में गेस्ट हाउस पहुंचा और अपने रूम की और गया.. सुशील को बुलाना तो मुझे म्यूज़िक की आवाज़ आने लगी रूम के दरवाजे से पहले एक खिड़की है.. वो खिड़की खुली हुई थी और मैंने उसमे से अंदर झाँका और देखा तो मेरे कदम वहीं पर रुक गये.. माँ ने अभी भी वही साड़ी पहनी हुई थी और विकास माँ के साथ डांस कर रहा था। माँ वैसे कभी डांस नहीं करती.. लेकिन उन्हे डांस करता देखा में एकदम सोच में पड़ गया और देखने लगा। फिर माँ ने विकास से कहा कि बेटा तुम्हारे ज़िद करने पर मैंने साड़ी पहन ली और तुम्हारे कहने पर डांस भी कर लिया क्यों अब तो बस तुम्हारी इच्छा पूरी हो गयी ना? अब जाओ अगर राहुल यहाँ आ गया तो वो क्या सोचेगा? और वैसे भी शादी में तुम्हारी ज़रूरत है.. लेकिन तभी लाईट बंद हो गई और मैंने माँ की आवाज़ सुनी.. माँ बोल रही थी कि यह क्या कर रहे हो विकास? और फिर बेड पर गिरने की आवाज़ आई और फिर नाईट लेम्प जला। तो मेरी आखें फटी की फटी रह गयी.. मेरी माँ विकास के नीचे थी और बोल रही थी यह क्या कर रहे हो.. छोड़ो मुझे.. नहीं तो में ज़ोर चिल्लाऊँगी.. लेकिन फिर भी विकास माँ के ऊपर से नहीं हटा और बोला कि आंटी में आपको बहुत प्यार करता हूँ और आप बहुत सुंदर हो.. प्लीज़ मुझे एक बार आपको प्यार करने दो.. प्लीज़ और फिर वो माँ को किस करने लगा और सुशील भी उस समय वहीं पर था। माँ ने उससे कहा कि सुशील प्लीज़ रोको इसे.. देखो यह क्या कर रहा है? सुशील पास आया और माँ के पास बैठकर उनके बूब्स को पकड़कर बोला आंटी प्लीज़ हमें प्यार कर लेने दो.. आपको देखकर आज बहुत प्यार आ रहा है और विकास अभी भी माँ को चूमे जा रहा था और में यह सब देखकर बहुत हैरान रह गया.. मेरी एकदम बोलती ही बंद हो गयी। चाह कर भी में माँ की मदद के लिए नहीं जा रहा था और माँ ने उनसे छूटने की बहुत कोशिश की वो हाथ पैर पटक रही थी जिसकी वजह से माँ की चूड़ियों की आवाज़ रूम में गूंजने लगी। फिर सुशील ने माँ के हाथ पकड़े और विकास माँ के ब्लाउज के बटन खोलने लगा और उसने एक एक करके सारे बटन खोल दिए और अब माँ ब्रा में थी.. विकास ने ब्रा भी उतार दी और माँ के गोरे मोटे मोटे बूब्स बाहर आ गये और उन पर गहरे भूरे निप्पल क्या लगा रहे थे।

तो माँ अभी भी छूटने की कोशिश कर रही थी.. लेकिन एक और तो सुशील ने माँ के हाथ पकड़े हुए थे और विकास माँ के ऊपर चड़कर बैठा था। फिर विकास नीचे की और बड़ा और उसने माँ की साड़ी को खींचकर निकाल दिया.. माँ अब सिर्फ़ पेटिकोट में ही रह गयी। तो विकास ने साड़ी को सूँघा और माँ को दिखाते हुए फेंक दिया तो माँ रोने लगी और बोली नहीं नहीं प्लीज़ मुझे जाने दो.. लेकिन इससे उन दोनों को कोई फर्क नहीं पड़ा बल्कि माँ को रोता देखा तो उन्हे और जोश आ गया। तभी विकास बोला कि आंटी प्लीज़ एक बार कर लेने दो.. हम दोनों से किसी को कुछ भी पता नहीं चलेगा। आप सोच लेना कि आज आपकी सुहागरात है और आज आपकी नई नई शादी हुई है। तो माँ बोली कि में तुम्हारी माँ की उम्र की हूँ प्लीज मुझे जाने दो.. में कहीं मुहं दिखाने लायक नहीं रहूंगी.. लेकिन उन दोनों ने माँ को नहीं जाने दिया और फिर सुशील जो अब तक माँ के हाथ पकड़े हुए था.. वो हाथ छोड़कर माँ के बूब्स दबाने लगा। माँ अपने चूड़ियों से भरे हाथों से अपने बूब्स छुपाने लगी और विकास ने माँ का पेटीकोट भी निकल दिया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

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अब माँ एकदम नंगी दोनों के सामने बिस्तर पर लेटी हुई थी और माँ अपने नंगे खूबसूरत बदन को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी और माँ ने अपने पैरों को मोड़कर एक दूसरे से चिपका लिया ताकि उनकी चूत छुप जाए और अपने हाथों से बूब्स को छुपा लिया.. लेकिन विकास और सुशील हवस में एकदम पागल हो चुके थे.. उन दोनों ने अपने कपड़े उतारे और माँ पर टूट पड़े। विकास सीधा माँ की चूत पर झपटा और माँ के पैरों को चौड़े करके चूत तक पहुंचा और माँ की झांटो से भरी चूत को चाटने लगा और सुशील माँ के बूब्स पर झपटा और ज़ोर ज़ोर से दबाने लगा और चूसने लगा। तभी माँ की चीख निकल गयी.. क्योंकि सुशील ने माँ के बूब्स को काट लिया था और फिर भी माँ ने अपना विरोध खत्म नहीं किया। माँ अभी भी उन्हे रोकने की कोशिश कर रही थी.. लेकिन वो कुछ ना कर सकी। यह विरोध 5 मिनट तक चलता रहा और अब माँ थक चुकी थी और उन दोनों के बूब्स चूसने और चूत चाटने के कारण आहे भरने लगी थी। विकास माँ की चूत चाट रहा था और चूत अब एकदम गीली हो गयी थी और माँ की चूत में से पानी आने लगा था। यह निशानी थी कि माँ अब कामुक हो रही थी.. तो विकास बोला कि देखो आंटी अब तो आप भी चुदने को तैयार हो गयी हो.. आपकी चूत में से पानी निकल रहा है और आप आहे भी भर रही हो। तो विकास ने सुशील से कहा कि पहले में इनको चोद लेता हूँ.. फिर तू चोद लेना और सुशील मान गया और साईड में आकर बैठ गया। तो विकास अब माँ के बीच में आ गया और अपना लंड को जो कि 6 इंच का लंड था.. वो माँ की चूत पर लगा दिया और एक झटका दिया तो लंड बहुत आसानी से अंदर चला गया और माँ के मुहं से बस हल्की सी आह निकली। तो यह देख विकास माँ से बोला कि क्यों अंकल आज भी आपको चोदते है ना? लेकिन माँ ने कुछ जवाब नहीं दिया.. बस वो लेटी रही और विकास धीरे धीरे धक्के मारने लगा और माँ के बूब्स भी दबाता और चूसता जा रहा था। माँ भी आहे भरने लगी.. थोड़ी देर में माँ ने अपने दोनों पैरों को विकास की कमर पर रख लिया और उसे बांध लिया और अब माँ की मोटी मोटी जांघो ने विकास को दबोच लिया और माँ अब ज़ोर ज़ोर से आहें भर रही थी और विकास को कसकर पकड़ रखा था। फिर विकास के हर एक धक्के की वजह से माँ के मोटे मोटे बूब्स ज़ोर ज़ोर से हिलते.. जिन्हें देखकर विकास को जोश आ जाता और वो तेज़ी से धक्के लगाता और थोड़ी देर में विकास ने अपनी स्पीड बड़ा दी और 10-15 धक्को के बाद विकास माँ की चूत में ही झड़ गया और माँ भी उसके साथ ही झड़ गयी और विकास माँ के ऊपर गिर गया। माँ और विकास दोनों पसीने से भीगे हुए थे और तेज़ी से सांस ले रहे थे। अब विकास हटा और सुशील आया तो उसने माँ की चूत में देखा और माँ की साड़ी उठाई और उसमे से बाहर निकल रहा वीर्य और पानी को साफ किया। फिर माँ की चूत में उंगली घुसा दी और अंदर बाहर करने लगा.. थोड़ी देर अंदर बाहर करने के बाद उसने माँ की चूत को चाटना शुरू किया और फिर माँ की चूत गीली हो गयी और सुशील के इस तरह काम करने से माँ फिर से उत्तेजित हो गयी और आहे भरने लगी।

माँ ने सुशील के सर को पकड़कर अपनी चूत में घुसा दिया.. विकास ने सुशील को जल्दी करने को कहा.. क्योंकि बहुत देर हो गयी थी। तो सुशील उठा और उसने माँ की चूत में अपना लंड लगाया और धक्के मारने लगा और दो मिनट के बाद ही चूत के अंदर डाल दिया और माँ के ऊपर ही गिर गया.. माँ भी उसी के साथ झड़ गयी और माँ भी तेज़ी से सांस ले रही थी। सुशील माँ के ऊपर से हटा और माँ की साड़ी से अपना पसीना साफ किया और फिर माँ का पसीना भी साफ किया और हट गया। तो माँ ने बिस्तर पर पड़ी चादर को उठाकर अपने बदन को ढक लिया और रोने लगी.. विकास और सुशील माँ के पास आए और माँ को चुप करने लगे। तो विकास बोल रहा था कि सॉरी आंटी.. हम आपसे बहुत प्यार करते है और आज आप इस साड़ी में बहुत ही सुंदर और सेक्सी लग रही थी इसलिए हम अपने आप पर काबू नहीं रख पाए। उन दोनों ने माँ को दूसरे कपड़े लाकर दिए और माँ को पहनने को कहा.. माँ चादर में ही लिपटी हुई बेड से उठी और बाथरूम में गयी और कपड़े पहनकर बाहर आई तब तक विकास और सुशील ने भी कपड़े पहन लिए थे और फिर माँ बाहर आई और एक कोने में जाकर खड़ी हो गई।

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विकास माँ के पास गया तो माँ ने रोना चालू कर दिया और बोली कि अब में किसी को मुहं दिखाने के काबिल नहीं रही.. तुम लोगो ने मेरे साथ ही ऐसा क्यों किया? अब में अपने पति और बेटे को क्या मुहं दिखाऊंगी? तो विकास बोला कि आंटी प्लीज़ हमे माफ़ कर दो.. हम आपसे बहुत प्यार करते है और आपको पाना चाहते थे और बस हम अपने आप पर काबू नहीं रख पाए और आपके साथ सेक्स सम्बन्ध बना लिए। फिर विकास आगे आया और बोला कि आंटी आप चिंता मत करो हम किसी को कुछ नहीं बताएगे कि आज यहाँ पर क्या हुआ है? और वैसे भी इस समय गेस्ट हाउस में कोई भी नहीं है किसी को पता भी नहीं चलेगा। तो माँ ने जब यह सुना तो उनका रोना थोड़ा कम हो गया और विकास ने माँ के आंसू साफ किए और उन्हे साथ चलने को कहा तो माँ ने मना किया.. लेकिन विकास बोला कि आंटी हम आपको ऐसे अकेला नहीं छोड़ेगे.. आपसे हम बहुत प्यार करते है और आगे भी करते रहेगें। तो माँ ने यह बात सुनकर विकास के सर पर प्यार से हाथ फेरा और मैंने अपने फोन से विकास को कॉल किया और में वहाँ से दूर चला गया था और विकास से कहा कि में वहाँ पर आ रहा हूँ और दो मिनट के बाद में रूम पर पहुंचा तब तक रूम की हालत एकदम सही हो गई थी। बिस्तर जो चुदाई के कारण अस्त व्यस्त था.. वो सही हो गया और माँ भी नॉर्मल हो गयी और उन्हे देखकर ऐसा नहीं लगा रहा था कि उनके साथ अभी दो जवान लड़को ने उनको चोदा है और विकास ने तो अपने भाई की शादी में अपनी सुहागरात बना ली थी। फिर जब हम शादी की जगह पहुंचे तो लगभग सब काम खत्म हो गये थे और आंटी ने जो सामान मँगवाया था वो हमने आंटी को दे दिया। आंटी ने विकास से पूछा कि वो इतनी देर कहाँ था? तो विकास ने कहा कि बस यही था.. में किसी काम में व्यस्त था और वो माँ को देखकर मुस्कुराया तो माँ ने शरम से अपनी नज़रे झुका ली और हल्की सी स्माईल दी।

फिर हम वहीं पर बैठ गये और माँ भी हमारे साथ थी.. विकास ने अपना मोबाईल ज़ेब से बाहर निकाला और किसी को मैसेज किया इतने में सुशील का मोबाईल बजा और थोड़ी देर बाद सुशील ने मुझसे कहा कि वो बोर हो रहा है.. चलो हम घूमकर आते है मैंने विकास को भी बुलाया। तो सुशील ने कहा कि हो सकता है उसकी यहाँ पर ज़रूरत हो हम थोड़ी देर में आ जाते है.. यह कहकर वो मुझे अपने साथ ले गया और इधर उधर की बातें करने लगा। तो मैंने सोचा कि विकास ने ही सुशील को मैसेज किया होगा मुझे बाहर ले जाने के लिए और फिर मैंने भी सुशील से बहाना बनाया कि मुझे टॉयलेट आ गया है में अभी जाकर आता हूँ तुम यहीं पर रहो में वहाँ पर पहुंचा और में टॉयलेट में चला गया थोड़ी देर अंदर रुकने के बाद मैंने दरवाजा खोला और इधर उधर देखा तो सुशील कही भी नहीं दिखा। में बाहर आया और चुपचाप उसी जगह पर पहुंचा वहाँ पर सुशील तो था.. लेकिन विकास नहीं था और सुशील माँ से कुछ बोल रहा था। सुशील की बात ख़त्म होने के बाद माँ भी उठकर चली गयी.. मैंने उनका पीछा किया और देखा तो विकास दरवाजे पर खड़ा था माँ उसके पास गयी और वो माँ को लेकर गाड़ियों की पार्किंग में ले गया.. वहाँ पर बहुत उजाला था और माँ ने उससे पूछा कि यहाँ पर क्यों बुलाया है? और फिर विकास ने माँ को गले से लगा लिया और लिप पर किस करने लगा। माँ ने भी इस बार उसका साथ दिया।

तो विकास ने अपना किस तोड़ा तो माँ ने शरम से अपनी नज़रे नीचे झुका ली। वहाँ एक कार खड़ी थी.. उस कार के शीशे काले थे। फिर विकास ने माँ को कार में चलने के लिये कहा.. तो माँ ने कार में जाने में आनाकानी की.. मैंने देखा कि माँ सर हिलाकर मना कर रही थी.. लेकिन विकास ने माँ को कार में अंदर ले ही गया और दरवाजा बंद कर लिया। उसके बाद कार हिलने लगी.. थोड़ी देर बाद कार और ज़ोर ज़ोर से हिलने लगी.. जिससे लगा कि कार के अंदर चुदाई का बहुत जबरदस्त प्रोग्राम चल रहा है और कुछ देर बाद एकदम सब कुछ शांत हो गया। कार का हिलना बंद हो गया और थोड़ी देर बाद कार का दरवाजा खुला.. उसमे से माँ बाहर निकली वो पसीने से एकदम भीगी हुई थी और हाफ़ भी रही थी और माँ की साड़ी की हालत खराब हो गयी थी। माँ के बाल बिखरे हुए थे और माथे का सिंदूर भी फेला हुआ था और बिंदी भी गायब थी और कार से निकलकर माँ अपने कपड़ो को ठीक कर रही थी। फिर विकास भी बाहर आया.. वो माँ को देखकर बड़ा खुश हो रहा था और उसने माँ को गले लगा लिया.. माँ भी उसके गले लग गई। माँ ने कहा कि उनको अब गेस्ट हाउस छोड़ कर आए और राहुल यानी मुझे बोले कि माँ गेस्ट हाउस सोने के लिए चली गई है.. माँ बोल रही थी कि कही राहुल को शक ना हो जाए। तो विकास बोला कि कुछ पता नहीं चलेगा.. वो यानी कि में सुशील के साथ सो रहा हूँ.. लेकिन माँ को क्या पता कि मुझे सब कुछ पता चल गया है। मुझे शुरू से लेकर आख़िर तक की पूरी दास्तान पता है। फिर विकास माँ को लेकर कार से चला गया और में भी वापस पहले वाली जगह चला गया और 5 मिनट बाद ही वापस आ गया। इसके बाद उसी दिन हम सब वहाँ से निकले और घर पर पहुंच गये। इसके बाद माँ भी अपनी रोजाना के कामों में लग गयी और नॉर्मल ही दिखती है। अब विकास और सुशील मेरे साथ कम टाईम बिताते और कई बार या तो सिर्फ़ सुशील ही मेरे साथ होता और विकास नहीं होता या फिर विकास होता तो सुशील नहीं होता। लेकिन मेरी माँ और विकास और सुशील का चक्कर अभी भी चल रहा है ।।

धन्यवाद …

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