माँ बेटे ने सुहागरात का मजा लिया

0
Loading...

प्रेषक : रोहित

हैल्लो दोस्तों… मेरा नाम रोहित है और में पुणे महाराष्ट्र का रहना वाला हूँ.. दोस्तों मेरी पिछली कहानी “माँ का बर्थ-डे गिफ्ट” को आप सभी ने बहुत पसंद किया.. उसके लिए धन्यवाद। अब में अपनी माँ के साथ आगे की कहानी शुरू करता हूँ.. दोस्तों अब माँ और में एक दूसरे से पूरी तरह खुल चुके थे और हर तरह से में माँ को चोद चुका था। फिर रात को 10:30 बजे में माँ के कमरे में गया। माँ ने पर्पल कलर का गाऊन पहना हुआ था और माँ पलंग पर लेटी हुई थी में पास गया और एक तरफ से करवट लेकर चिपककर सो गया।

माँ : क्या है? तुझे भी रोज रोज चुदाई करने की आदत पड़ गयी है में तेरी माँ हूँ कोई तेरी बीवी नहीं।

तो में माँ से चिपका हुआ था उनकी गर्दन पर हल्के हल्के किस कर रहा था।

माँ : मैंने कहा ना आज नहीं।

में : माँ मेरा लंड खड़ा हो गया है और अब में क्या करूं?

माँ : तेरे लंड को और काम ही क्या है जब देखो जब खड़ा हो जाता है।

में : माँ मुझे कर लेने दो ना वैसे भी कल पापा आने वाले है फिर दो दिन आप उन्ही से चुदोगी।

फिर में अपना हाथ नीचे की तरफ ले गया और धीरे धीरे हाथ को कमर से जाँघो घुटनों तक ले गया और गर्दन पर चूमने लगा और वो आहे भरने लगी।

माँ : तूने तो माँ बेटे के रिश्ते का मतलब ही बदल दिया.. चल ठीक है कर ले वैसे भी कल तेरे पापा आने वाले है। फिर मैंने अपने पूरे कपड़े उतार दिए और माँ को जकड़ लिया और प्यार करने लगा, चूमने लगा और में होंठो पर किस करने लगा। ज़ोर ज़ोर से होंठो को पीने लगा.. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। फिर मैंने माँ से कहा कि आप खड़े हो जाइये और माँ बेड के पास आ गयी.. तो में माँ के गाउन को थोड़ा नीचे से धीरे धीरे ऊपर करने लगा और मुझे सामने काले कलर की पेंटी दिख गई। दोस्तों में तो पागल हो गया था.. गोरी सफेद त्वचा पर काली पेंटी क्या मस्त लग रही थी और में कुछ देर ऐसे ही देखता रहा.. तो माँ बोली।

माँ : इतने ध्यान से क्या देख रहा है? कितनी बार तो तू अपनी माँ को नंगी कर चुका है।

में : हाँ माँ.. लेकिन में क्या करूं आप बहुत खूबसूरत और सेक्सी हो.. मुझे आपको देखने से मन नहीं भरता.. ऐसा लगता है आपको देखता ही रहूँ।

माँ : तो तू अपनी माँ का दीवाना हो चुका है। फिर ऐसे ही में माँ के गाउन को ऊपर लेट गया और गाउन पेट तक पहुंचा ही था.. तो मैंने अपना मुहं माँ की सेक्सी काली पेंटी के ऊपर रख दिया और ऊपर से ही माँ की चूत को किस करने लगा और पेंटी के ऊपर ही मुहं घुमाने लगा.. में तो अब जन्नत की सैर कर रहा था। फिर में माँ के गाउन में समा गया और अपना सर गाउन के ऊपर से निकाल दिया और अब में माँ के गाउन में था और खड़े होकर गांड पर हाथ घुमा रहा था और किस कर रहा था। दोस्तों में क्या बताऊँ? जन्नत से भी ज़्यादा मज़ा आ रहा था। फिर माँ बोली..

माँ : तू बड़ा सेक्सी हो गया है। रोज कुछ ना कुछ अलग करता है अपनी माँ के साथ.. ऐसे सेक्सी तरीके से तो तेरे पापा ने भी नहीं किया है।

में : माँ आप तो जन्नत की परी हो.. आपको नंगी देखते ही में सब भूल जाता हूँ और जो मन में होता है वैसा करता हूँ और फिर हमारी मस्तियों का सिलसिला चलता रहा.. में माँ के गाउन में था और हम एक दूसरे के साथ लेटे हुए थे.. कभी बात करते तो में कभी किस करता तो कभी माँ के गालों पर आहे भरता थोड़ी जीभ से चेहरे पर हल्के से चाटता बहुत ही ज़्यादा मज़ा आ रहा था।

माँ : आआअहहा… बस कर बेटा अब क्या ऐसे ही मेरे साथ गाउन में पड़ा रहेगा? माँ अब पूरी तरह जोश में आ चुकी थी।

में : माँ मुझे आपके गाउन में बहुत अच्छा लग रहा है। फिर मैंने गले पर हल्के से किस किया और हम हल्के हल्के किस करने लगे और मैंने अपने आपको गाउन से बाहर निकाला और में बेड के पास खड़ा हो गया.. मैंने माँ से कहा।

में : माँ आप भी खड़ी हो जाओ।

माँ : नहीं अभी में खड़ी नहीं हो सकती।

में : माँ प्लीज।

फिर मैंने माँ का हाथ पकड़कर हल्के से खींचा तो वो मान गयी और मेरे सामने खड़ी हो गयी। तो में माँ का गाउन धीरे धीरे ऊपर करने लगा और गाउन पूरा निकाल दिया और अब माँ मेरे सामने काली पेंटी और सफेद ब्रा में खड़ी थी और ऐसे ही में माँ के ऊपर फिर से झपट पड़ा और अपने पूरे आगोश में ले लिया.. पूरा जकड़ लिया और नीचे से ऊपर तक प्यार करने लगा और लिप किस करने लगा। माँ की गोल गोल गांड पर पूरा हाथ घुमाने लगा। माँ की पेंटी के अंदर हाथ डालकर गांड को सहलाने लगा।

माँ : आह्ह्ह…. कितना प्यार कर रहा है मेरे बेटे.. इतना तो मेरे साथ अपनी सुहागरात में भी नहीं हुआ था।

में : माँ मेरे रहते आपकी हर रात सुहागरात से बड़कर होगी। ऐसा कहकर मैंने माँ को अपने सामने पलटकर खड़ा किया और फिर ब्रा का हुक खोल दिया और पीछे से बूब्स को हल्के हल्के से दबाने लगा और गले के पास हल्के किस करने लगा।

फिर ऐसे ही मैंने पेंटी में हाथ डाला वाह कसम से माँ की चूत को हाथ लगाने में ही बहुत मज़ा आ रहा था और फिर मैंने माँ की पेंटी को उतार दिया और माँ को सामने खड़ा किया और नीचे से ऊपर तक देखने लगा।

माँ : क्या देख रहा है? पहली बार देख रहा है क्या?

में : माँ मुझे तुम नंगी बहुत अच्छी लगती हो यह कहकर मैंने माँ की चूत पर किस किया और फिर जीभ से चूत चाटने लगा और फिर चूत के दोनों होंठो को खोलकर पीने लगा।

माँ : में खड़े खड़े थक गयी हूँ और यह कहकर माँ बेड पर जाकर लेट गई। में बेड पर जाकर माँ की चूत को पीने लगा।

माँ : बस और कितना चाटेगा? मेरी चूत की तो जान ही निकल गयी। तू पूरी चूत का पानी पी गया है।

माँ यह ही बोलती रही और में चूत चाट रहा था। फिर में उठा और मेरा मुहं थोड़ा गीला था.. तो में माँ के पास गया।

में : चूत खोलो।

माँ : अभी 5 मिनट रुक जा में थक चुकी हूँ।

तो में माँ से लिपट कर लेट गया और चूत सहलाने लगा और किस करने लगा तो माँ मेरा मुहं हटाने लगी।

माँ : गंदी बदबू आ रही दूर हटा तू कैसे चाटता है इस गंदी जगह को।

में : माँ मुझे तो बहुत अच्छी लगती है उसके टेस्ट के सामने तो सब बेकार है।

फिर ऐसे ही बातों का सिलसिला चलता रहा और 10 मिनट के बाद में माँ के ऊपर लेट गया और प्यार करने लगा।

में : माँ थोड़ा चूत को खोलो।

माँ : हाँ हाँ चल जल्दी डाल और मुझे फ्री कर।

फिर माँ ने अपने दोनों हाथ से चूत को खोला।

माँ : चल अब डाल भी दे।

फिर मैंने अपने लंड को चूत के ऊपर रखा और हल्के से अंदर डाला और मेरा लंड बहुत अच्छे तरीके से अंदर चला गया और में माँ के ऊपर पूरा लेट गया.. बहुत अच्छा लग रहा था। फिर मैंने लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया और तब में माँ को किस भी कर रहा था।

माँ : आज तो तूने मुझे मार ही डाला है और अब तो होठों को छोड़।

फिर भी मैंने एक ना सुनी और में चुदाई और किस कर रहा था.. मैंने माँ को पूरा जकड़ा हुआ था और माँ की साँसे तेज़ चलने लगी। मेरा पूरा लंड माँ की चूत में समा चुका था और में मज़ेदार चुदाई के मज़े ले रहा था। तो ऐसे ही 20-25 मिनट तक में चुदाई करता रहा।

में : माँ मेरा होने वाला है और यह कहकर मैंने अपने लंड का पूरा दबाव चूत पर लगाया और अपना पूरा पानी माँ की चूत में छोड़ दिया और में कुछ देर तक ऐसे ही पड़ा रहा और में पास में सो गया.. सुबह 5:30 बजे माँ ने मुझे उठाया में बहुत गहरी नींद में था।

माँ : उठ बेटा चल अपने कपड़े पहन ले तेरे पापा आने वाले है.. 6:30 बजे उनकी ट्रेन का टाईम है और तुझे उनको लेने स्टेशन जाना है।

में : ठीक है माँ.. लेकिन इधर तो आओ।

माँ : क्या है?

तो माँ पास आई… फिर मैंने माँ का हाथ पकड़कर अपने ऊपर खीँच लिया और माँ मेरे ऊपर आकर गिर गयी।

माँ : अब क्या है? रात को इतना सारा किया है तूने और अब तो बिल्कुल भी नहीं.. तेरे पापा की ट्रेन का टाईम होने वाला है।

में : माँ चलो भी.. में जल्दी से डाल देता हूँ.. थोड़ी देर में हो जायेगा।

यह कहकर मैंने माँ को बेड पर पटका और उनका गाउन ऊपर करके लंड को चूत में डाल दिया और चुदाई शुरू की दोस्तों सुबह सुबह की चुदाई में बहुत मज़ा आता है और में चुदाई करता रहा 10 मिनट बाद।

माँ : जल्दी कर मुझे पता है तेरी सुबह की चुदाई जल्दी खत्म नहीं होती है प्लीज… थोड़ा जल्दी कर और में लगातार धक्के लगाये जा रहा था। फिर 20 मिनट बाद..

माँ : अब बहुत हो गया.. अब उठ जा। तेरे पापा की ट्रेन का टाईम हो गया है।

में : माँ सिर्फ़ 5 मिनट रुको।

दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब में ज़ोर ज़ोर से पूरी मेहनत से धक्के लगाने लगा और मैंने एक जोरदार पिचकारी माँ की चूत में छोड़ी और में जल्दी से उठा और कपड़े पहने फिर फ्रेश होकर बाईक लेकर पापा को लेने स्टेशन चला गया। में पापा को 7:30 बजे स्टेशन से लेकर घर आ गया था.. क्योंकि ट्रेन 30 मिनट लेट थी। फिर माँ हमारे लिए चाय लेकर आई पापा और मैंने बातचीत की फिर माँ, पापा से बोली कि

माँ : आप थोड़ा आराम कर लीजिये और मुझसे भी कहा कि तू भी थक गया होगा.. जाकर सो जा।

तो में समझ गया और में अपने रूम में सो गया.. लेकिन मुझे नींद नहीं आ रही थी। फिर 30 मिनट के बाद में माँ के रूम के पास गया और दरवाजे पर ध्यान से सुना तो वो दोनों भी शुरू हो चुके थे और में अपने रूम में आ गया और सो गया। फिर 2 घंटे बाद माँ ने मुझे आवाज़ लगाई।

माँ : उठ रोहित बेटा 10 बज चुके है.. चल जल्दी से उठ में नहाने जा रही हूँ और तुम्हारा नाश्ता तैयार है।

तभी मुझे भी माँ के साथ नहाने का ख्याल आया.. मैंने पापा को कमरे में देखा वो सो रहे थे और में बाथरूम के पास चला गया और दरवाजा बजाया।

माँ : कौन है?

में बिल्कुल चुप था क्योंकि मुझे पता था कि अगर कहूँगा में हूँ तो माँ पापा के डर से दरवाजा नहीं खोलेगी और मैंने फिर से दरवाजा बजाया।

माँ : ओह हो कौन है? कुछ बोलो तो.. आप हो क्या.. रोहित तो सो रहा है? फिर माँ ने हल्के से दरवाज़ा खोला में कोने में छुप गया था माँ टावल लपेटे हुई थी और में एकदम माँ के सामने आ गया और अंदर घुस गया और दरवाजा बंद कर दिया।

माँ : तू क्यों आया है तुझे पता है ना तेरे पापा यहाँ पर है चल जल्दी बाहर निकल।

में : माँ मैंने आपके रूम पर चेक किया है पापा घोड़े बेचकर सो रहे है।

माँ : (थोड़े गुस्से में) नहीं कुछ कह नहीं सकते तू अभी बाहर निकल।

में : ठीक है.. लेकिन पहले एक किस कर लेने दो।

माँ : इतना सारा करके भी तेरा पेट नहीं भरा अभी और एक किस चाहिये। में तुम दोनों बाप, बेटे के बीच में फंस गयी हूँ ठीक है और अब जल्दी से कर।

तो में माँ के पास गया और अपने होंठ माँ के होंठो से चिपका दिये और चूसने लगा और फिर मैंने झटके से माँ का गुलाबी कलर का टावल नीचे गिरा दिया और अब माँ पूरी नंगी थी.. में माँ को जमकर प्यार करने लगा और माँ जमकर ऐतराज़ कर रही थी।

माँ : नहीं नहीं बेटा नहीं.. तूने सिर्फ़ एक किस के लिये कहा था में शॉट नहीं मारने दूँगी.. मुझे रिस्क नहीं लेना।

लेकिन अब में कहाँ सुनने वाला था? में पूरे शरीर को चिपका कर प्यार करने लगा और मैंने एक हाथ से फव्वारा चालू कर दिया तो माँ और में भीगने लगे।

में : माँ अब हम भीग ही चुके है तो अब नहा लेते है.. लेकिन माँ का ऐतराज़ जारी था और मेरा काम भी।

तो मैंने माँ को साबुन लगाया.. पहले कंधे पर फिर बूब्स और पेट पर फिर पैरों से ऊपर चड़ते हुए चूत पर, बहुत सारा साबुन लगाया.. मुझे बहुत नरम अहसास हो रहा था। फिर माँ ने मुझे भी पूरे शरीर पर साबुन लगाया और मेरे तने हुए लंड पर भी।

माँ : (लंड को साबुन लगाते हुए) यह भी बहुत शरारती हो गया है।

फिर मैंने माँ को बाहों में लिया और प्यार करने लगा.. साबुन की वजह से नरम मुलायम अहसास हो रहा था और बहुत मज़ा आ रहा था। पूरा शरीर एक दूसरे से रगड़ रहा था और फिर 5 मिनट बाद मैंने माँ की चूत में खड़े खड़े ही लंड डाल दिया.. बहुत मस्त साबुन में भीगी हुई चूत का मुलायम अहसास हो रहा था और मैंने धीमी धीमी चुदाई शुरू की.. पूरा शरीर साबुन में भीगा हुआ था और हम मस्त हो रहे थे। में लगातार चुदाई कर रहा था और 10 मिनट बाद दरवाजा बजा तो दरवाजे पर पापा थे। दोस्तों में कसम से बोलता हूँ मेरी तो गांड फट गयी। मैंने झट से लंड चूत में से बाहर निकाला.. में डर के मारे तो कांपने लगा.. लेकिन मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था क्या करूं? माँ और में दोनों एक दूसरे की तरफ देख रहे थे.. तो फिर से दरवाजा बजा।

Loading...

पापा : डार्लिंग दरवाजा खोलो इतना टाईम क्यों लग रहा है? मुझे तुम्हारे साथ नहाना है।

माँ : नहीं नहीं अभी नहीं।

पापा : क्या हुआ डार्लिंग? क्यों नहीं?

माँ : में नहा चुकी हूँ और बस कपड़े पहन रही हूँ।

पापा : तो क्या हुआ फिर एक बार नहा लेंगे और कपड़े तो मेरे सामने भी पहन सकती हो चलो.. अब जल्दी से दरवाज़ा खोलो।

माँ : ठीक है लेकिन आप पहले रोहित के रूम में जाकर उसे उठने के लिए आवाज़ देकर आइये।

पापा : ठीक है डार्लिंग में बस 2 मिनट में आया।

फिर मैंने जल्दी से बदन साफ किया और मेरी नाईट पेंट पहन कर बाथरूम के पीछे से छत पर चड़ गया और कुछ मिनट बाद।

पापा : डार्लिंग रोहित अपने कमरे में नहीं है शायद उठ गया है।

तो माँ ने दरवाजा खोला माँ तब भी पूरी नंगी थी और पापा अंदर चले गये और मैंने राहत की सांस ली माँ की समझदारी ने मुझे बाल बाल बचा लिया और में अपने कमरे में जाकर तैयार हुआ और हमने साथ में नाश्ता किया और मैंने 2 दिनों तक कुछ नहीं सोचा.. बिल्कुल नॉर्मल व्यवहार किया और 3 दिन के बाद रात को पापा को स्टेशन छोड़कर घर आया। पापा को बिजनेस की वजह से बाहर जाना था और में जब घर आया तो माँ को पता था कि में चुदाई करने वाला हूँ इसलिए माँ मेरे लिए चमकदार नीले कलर की मेक्सी पहनकर बैठी थी।

में जो 2 दिन से सेक्स का भूखा था। फिर मैंने जमकर माँ के साथ सुहागरात मनाई और माँ को बहुत चोदा… मैंने माँ को धक्के पर धक्के मारे और हम एक दूसरे से बात करने लगे।

माँ : तू तो बिल्कुल मेरे ऊपर टूट पड़ा है।

में माँ से पूरा लिपटा हुआ था।

में : माँ में क्या करूं… में तो आपके बिना पागल हो जाता हूँ.. मैंने खुद को 2 दिन कैसे कंट्रोल किया है मुझे ही पता।

माँ : हाँ तूने तो हम दोनों को मरवा ही दिया था तुझे मैंने मना किया था फिर भी तू नहीं माना.. में क्या कहीं भागी जा रही थी?

में : हाँ माँ डर तो में भी बहुत गया था और मेरे तो रोंगटे खड़े हो गये थे पापा अगर हमको देख लेते तो?

माँ : ऐसा सपने में भी मत सोचना तूने तो जन्मदिन पर गिफ्ट के बहाने मुझे ब्लेकमेल करके फायदा उठाया था और तब से लगातार मुझे चोद रहा है.. तू जैसे मेरा बेटा नही पति है। नई शादी जैसे सुहागरात मना रहा है।

में : माँ आप तो मेरी दुल्हन हो और मैंने एक जोरदार किस किया।

फिर कुछ देर ऐसे ही बातों का सिलसिला चलता रहा और में माँ के ऊपर फिर चड़ गया और लंड, चूत में घुसा दिया और चोदने लगा।

माँ : तेरा इंसान का लंड है या किसी घोड़े का.. इतनी जल्दी जल्दी खड़ा हो जाता है।

फिर में लगातार चुदाई किए जा रहा था। मेरा पूरा लंड माँ की गीली चूत से भीग चुका था और 30 मिनट बाद फिर एक बार में माँ की चूत में झड़ गया और हम ऐसे ही रात भर पड़े रहे। सुबह 11 बजे मेरी आँख खुली तो मैंने कपड़े पहने और हॉल में गया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

माँ : किचन से बोली.. क्या उठ गया तू? अभी चाय देती हूँ।

फिर मैं चाय नाश्ता करके नहाकर बाहर चला गया और 3 बजे वापस आया। हम दोनों ने साथ में लंच लिया।

में : माँ चलो ना… आज गार्डन घूमने चलते है।

माँ : गार्डन.. तू क्या कोई छोटा बच्चा है जो गार्डन चलना है?

में : प्लीज़… माँ चलो ना प्लीज़।

माँ : ठीक है मेरे प्यारे बेटे।

में : माँ मेरी एक और इच्छा भी है?

माँ : वो क्या?

में : मुझे आज आपके साथ असली सुहागरात मनानी है और आज रात आप दुल्हन की लाल साड़ी पहनो।

माँ : चल हट बड़ा आया अपनी माँ के साथ सुहागरात मनाने वाला।

में : प्लीज़… माँ मान जाओं ना.. प्लीज प्लीज़।

माँ : दुल्हन के मेकअप में बहुत टाईम लगता है और दुल्हन के मेकअप के आधे सामान मेरे पास नहीं है।

में : माँ तो क्या हुआ हम आज शाम को मार्केट से ले लेंगे?

माँ : तो तू नहीं मानेगा.. हमेशा अपनी जिद मनवा कर ही रहता है.. चल ठीक है।

तो मुझे अब सिर्फ़ रात का इंतजार है और में जाकर अपने कमरे में सो गया.. क्योंकि रात में जागने के लिए आराम ज़रूरी था और मुझे माँ ने 4:45 बजे उठाया.. माँ और में पूरी तरह तैयार हो गये.. चाय पीकर बाईक पर निकल पड़े।

माँ : कौन से गार्डन चलेगा?

में : कुछ ही मिनट में आ जायेगा देख लेना और 10 मिनट के बाद माँ को में लवर्स गार्डन ले आया और हम अंदर चले गये.. वहाँ पर बहुत जवान जोड़े थे।

माँ : यह कहाँ ले आया है तू बेटा?

में : माँ यहाँ पर हम जोड़े है.. लवर जोड़े।

फिर हम थोड़े अंदर जाकर एक कोने में पेड़ के पास बैठ गये और बातें करने लगे.. वहाँ पर मस्त हवा चल रही थी और ऐसे ही 1 घंटा बीत गया और फिर हम मार्केट गये। तो माँ ने कुछ मेकअप का समान लिया फिर हम एक लेडीस शॉप में गये वहाँ पर माँ ने ब्रा और पेंटी खरीदी में शॉप के बाहर ही खड़ा था और फिर हम घर आ गये। शाम के 7:30 बज चुके थे और माँ खाने की तैयारी कर रही थी क्योंकि माँ को तैयार होना था और 8:30 बजे तक खाना बन गया।

माँ : चल तू भी मेरे साथ जल्दी से खाना खा ले।

में : ठीक है।

तो हमने साथ में खाना खाया और 9:00 बज चुके थे।

माँ : चल में अब तैयार होने जा रही हूँ। में तुझे जब तक खुद आवाज़ ना दूँ तब तक तू हॉल में ही रहना चाहे कितना भी टाईम लगे.. में तुझे खुद आवाज़ दूँगी।

में : ठीक है माँ।

फिर माँ रूम में चली गयी और ऐसे ही आधा घंटा बीत गया.. मेरी माँ मेरे लिए दुल्हन बन रही थी और आज में अपनी माँ के साथ सुहागरात मनाने जा रहा था और एक एक मिनट सालों जैसा लग रहा था मेरी तो घड़ी से नज़र हट ही नहीं रही थी और इंतजार बड़ता जा रहा था। 10:20 बजे अब तो इंतजार की सारी हद समाप्त हो गयी थी और में जल बिन मछली जैसा तड़प रहा था। 11 बजे अब तो बहुत हद हो गयी। में कंट्रोल से बाहर हो गया और जाकर माँ के रूम का दरवाजा बजाया।

माँ : क्या है तुझे मैंने कहा था ना तू नहीं आना।

में : माँ अब और इंतजार नहीं होता.. जल्दी करो ना।

माँ : इंतजार तो करना पड़ेगा.. यह दुल्हन तो टाईम लगायेगी।

तो मुझसे इंतजार नहीं हो रहा था.. लेकिन मेरे पास इंतजार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। फिर 11:45 पर माँ ने आवाज लगाई।

माँ : रोहित दरवाजा खोल दिया है।

यह सुनते ही मुझे कपकपी हो गयी कुछ ही कदमो पर मेरी दुल्हन तैयार थी.. मैंने धीरे धीरे अपना कदम रूम की तरफ बड़ाया और दरवाजे को धीरे से खोला और धीरे धीरे में रूम में गया.. लेकिन रूम में ट्यूब लाईट बंद थी.. हल्का सा ज़ीरो बल्ब चालू था। में बेड के पास गया.. माँ ने लाल कलर की भारी काम वाली साड़ी पहनी हुई थी और साड़ी का घूँघट ओढ़े बैठी थी।

में : माँ मेरी दुल्हन का चेहरा तो दिखाओ।

फिर मैंने पुरानी फिल्म जैसे माँ का घूँघट धीरे धीरे ऊपर किया.. माँ और मैंने एक दूसरे की तरफ देखा और माँ ने नई नवेली दुल्हन की तरह आँखे शरमाकर नीचे की तो मुझे तो यह सब किसी सपने की तरह लग रहा था।

में : माँ आप यहाँ बेड के पास खड़े हो जाये.. में अपनी दुल्हन को रोशनी में ऊपर से नीचे तक निहारना चाहता हूँ। फिर माँ को मैंने बेड के पास खड़ा कर दिया और लाईट को चालू कर दिया और जैसे ही लाईट चालू हुई तो माँ दुल्हन की साड़ी में क्या लग रही थी? में, माँ को पूरी तरह ऊपर से नीचे तक नैनो से निहारने लगा।

माँ : देख बेटा अच्छे से देख तेरी दुल्हन को… मैंने बहुत मेहनत की है।

में : धन्यवाद… माँ सच में यह सब तो जैसे आपने मेरे सपने को पूरा कर दिया हो।

फिर में, माँ के पास गया उनका हाथ अपने हाथ में लिया और चूमने लगा। माँ की लाल कलर की चूड़ियों को उतारने लगा और दोनों हाथों की चूड़ियों को उतारने के बाद मैंने माँ का नेकलेस उतारा, कान के उतारे और फिर माँ की साड़ी का पल्लू नीचे गिरा दिया और फिर साड़ी को धीरे धीरे उतारने लगा। अब माँ मेरे सामने लाल पेटीकोट और ब्लाउज में थी.. में माँ के ब्लाउज के हुक एक एक करके खोलने लगा और पूरा ब्लाउज उतार दिया। फिर माँ को उंगली से स्पर्श करने लगा.. माथे से नीचे जाते हुए पेट पर और नीचे जाते हुए मैंने माँ के पेटीकोट का नाड़े को हल्का सा झटका दिया और पेटीकोट नीचे गिर गया। तभी मेरे होश उड़ गये.. माँ ने ब्रा और पेंटी तक एक ही कलर पहनी हुई थी। माँ मेरे सामने लाल कलर की ब्रा पेंटी में खड़ी थी.. गोरी गोरी जांघो के बीच माँ की लाल कलर की पेंटी जो चमकीली थी और ब्रा भी एक ही कपड़े की थी। दोस्तों सच में गजब का नज़ारा था और फिर में माँ के ऊपर झपट पड़ा और उन्हें बाहों में ले लिया और माँ को प्यार करने लगा। फिर गर्दन पर हल्के किस करने लगा और पेंटी के ऊपर से हाथ घुमाने लगा। पूरी गोल गोल गांड को सहलाने लगा.. पेंटी के ऊपर मज़ा ही मज़ा आ रहा था। फिर में माँ की ब्रा के हुक खोलने लगा।

माँ : रुक जा बेटा में अभी मुहं धोकर आती हूँ इतना भारी मेकअप जो किया है। फिर तू मुझे रातभर कहाँ उठने देगा। तो माँ बाथरूम में चली गयी और 5 मिनट बाद मुहं धोकर आई तो में माँ के ऊपर फिर झपट पड़ा और माँ की ब्रा का हुक खोल दिया और पेंटी को भी निकाल दिया और अब माँ मेरे सामने पूरी नंगी खड़ी थी। में माँ को पूरा बाहों में लेकर दबाकर प्यार करने लगा। होंठो को किस करने लगा.. चूसने लगा और माँ के बूब्स को दबाने लगा। माँ को उल्टी तरफ खड़ा करके बूब्स को दबाने लगा और चूत को सहलाने लगा। फिर हम बेड पर आ गये और में माँ के ऊपर और ज़ोर से टूट पड़ा।

माँ : रोहित बेटा में कहीं भागी नहीं जा रही।

तो में एक ना सुनते हुए ज़ोर ज़ोर से प्यार करने लगा और लंड को कूल्हों के ऊपर से रगड़ने लगा और में धीरे धीरे माँ की चूत के पास अपना मुहं ले आया दोनों हाथों से माँ के पैरों को घुमाकर अलग किया और चूत चाटने लगा.. धीरे धीरे चूत को अपने होठों से पीने लगा। माँ की चूत गीली हो गई थी.. में लगातार चूत चूस रहा था और माँ पूरे मज़े से सिसकियाँ भर रही थी आह्ह्ह और माँ ने मेरे सर को ऊपर से कसकर पकड़ लिया और दोनों जांघो से दबाया। में चूत को ज़ोर ज़ोर से चाट रहा था और चूत का पूरा पानी मेरे मुँह में गिर रहा था.. में चूत को चूस रहा था और माँ मेरे मुँह में झड़ चुकी थी और वो ढीली पड़ गयी और मेरा सर भी चूत से हटा दिया।

माँ : बस कर बेटा मेरा हो गया है अभी कुछ देर रुक जा।

तो माँ ठंडी होकर पड़ी थी.. में, माँ से चिपककर लेट गया मेरे मुँह पर माँ की चूत का पानी लगा हुआ था और बदबू आ रही थी।

में : माँ बहुत मज़ा आया आपकी चूत को चूसकर।

माँ : मेरी चूत का रस कोई जूस नहीं जो तुझे अच्छा लगे।

में : माँ आपकी चूत के रस के आगे तो हर जूस फीका है और में अपना लंड लेकर माँ के चहरे के पास गया।

में : माँ अब तुम लंड को चूसो।

तो में लेट गया और माँ मेरे लंड को ऊपर से नीचे तक धीरे धीरे चूसने लगी.. बहुत अच्छा लग रहा था और लंड को जैसे कोई जादुई अहसास हो रहा था। माँ एक हाथ से लंड को नीचे से पकड़कर मुँह से चूस रही थी.. करीब 5 मिनट चूसने के बाद मैंने माँ से कहा कि ..

में : माँ मेरा काम होने वाला है और माँ ने लंड को मुँह से बाहर निकाल दिया।

में : क्यों निकाला माँ चूसो ना?

माँ : तेरा काम होने वाला था और तेरा पानी मेरे मुँह में गिर जाता तो?

में : यही तो में चाहता हूँ आप मेरा पानी पी जाओ।

माँ : पागल हो गया है तू? तेरे लंड का इतना सारा पानी में पी जाऊँ.. बिल्कुल नहीं।

Loading...

में : माँ प्लीज़, प्लीज़ माँ और थोड़ी देर मनाने के बाद वो मान गयी।

माँ : ठीक है.. लेकिन पहले तू लंड को चूत में डाल और जब तेरा होने वाला हो तब लंड मुँह में डाल देना।

फिर मैंने माँ की चूत पर लंड रख दिया और एक ही झटके में लंड पूरा अंदर चला गया और में पूरा माँ के ऊपर लेट गया और लंड अंदर बाहर करने लगा। लंड को तो जैसे मुलायम मखमल सा अहसास हो रहा था और हम माँ, बेटे चुदाई का लुत्फ़ उठाने लगे सिसकियाँ भरने लगे अहह उफ्फ्फ और में लगातार चुदाई किए जा रहा था। फिर 30 मिनट बाद मुझे लगा कि में झड़ने जा रहा हूँ।

में : माँ अब में झड़ने वाला हूँ।

माँ : झड़ जाओ मेरी चूत में।

फिर माँ ने मुझे कसकर पकड़ लिया।

में : लेकिन मुझे आपके मुँह में झड़ना है।

माँ : फिर कभी अभी चूत में ही छोड़ दो मुझे बहुत अच्छा लगता है और में धीरे धीरे झटके लगाये जा रहा था और कुछ ही देर बाद मैंने लंड का पूरा दबाव चूत पर लगाया और अपना पूरा वीर्य चूत में भर दिया और में शांत हो गया और ऐसे ही हम सो गये। रात को मैंने 2 बार और लंबी चुदाई की.. पूरी रात माँ बेटे ने सुहागरात को इन्जॉय किया ।।

धन्यवाद …

Comments are closed.

error: Content is protected !!

Online porn video at mobile phone


hindi sex wwwwww sex kahaniyasexy storiysex stori in hindi fonthindi sex storyhindi sexi storeissaxy story hindi mhindhi sex storisexy story hundisex hinde storehindi sexy stroiessexy adult story in hindividhwa maa ko chodafree hindi sex storiessx stories hindisaxy story hindi mhindi sexy khanisexy stry in hindihindhi sexy kahanihindi story saxwww new hindi sexy story comhindi sexy stroysexi stories hindisexy srory in hindihindi new sexi storymummy ki suhagraatnew hindi sexy storysexy storiysexy syory in hindisexy new hindi storyfree hindi sex storiessagi bahan ki chudaisex hindi font storyhindi sexy stories to readreading sex story in hindianter bhasna comwww new hindi sexy story comsexy story hindi freemami ne muth marisex ki hindi kahanihindi sex kahani hindi mesex hindi sitorynew hindi story sexyhinde sexy kahanisexy story hindi comsexy story in hindi fonthindi sex khaniyahinde saxy storybhai ko chodna sikhayasex stories hindi indiahindi sex stories allhinde sex khaniahindi sxe storebaji ne apna doodh pilayafree hindisex storiesmosi ko chodasexy syoryhindi front sex storyhindi sex stowww sex story hindisax stori hindehindi sex kathahindi storey sexyhindi sex kahani hindi mehindi sexy soryhindi sexy sortyhindi sex katha in hindi fontchut land ka khelwww sex kahaniyasex stores hindesex stori in hindi fontchut land ka khelsexy stoy in hindiwww sex story in hindi comhindi sexy setorenew hindi sexi storynew hindi sex kahanisexy story hibdisex hind storehindisex storsexi storeishindi sexy stroyhindi sexy setorehindi sexy storysex story in hindi downloaddukandar se chudaichut land ka khelhindi sex kahani hindi fonthhindi sexsexy story com in hindisex hindi sitorysexy stioryhindi sexi storiehinde sexe store