मेरी चुदक्कड़ माँ का रंडीपन

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प्रेषक : करण …

दोस्तों मेरा नाम करण है और में लखनऊ में रहता हूँ, मेरे घर में मेरी माँ और पापा है। दोस्तों में पिछले कुछ सालों से कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ता आ रहा हूँ जिनको पढ़कर मुझे बहुत मज़ा आता है। मैंने अब तक इसकी बहुत सारी कहानियाँ पढ़ी है जिनको पढ़कर मैंने भी अपनी कहानी को आपके सामने रखने के बारे में बहुत विचार किया और बहुत सोचने के बाद आज में आप सभी लोगों को अपनी एक सच्ची कहानी सुनाने जा रहा हूँ। दोस्तों कहानी को शुरू करने से पहले में आप लोगों को अपनी माँ के बारे में बताता हूँ, मेरी माँ का नाम नीलम है और उसकी उम्र 47 साल है और उसकी हाईट 5 फिट 2 इंच है। वो बहुत गोरी है और दिखने में बिल्कुल ग़ज़ब है उसका सबसे बड़ा हथियार उसके मस्त चूतड़ है जिसको देखकर हर कोई उसका दीवाना हो जाता है क्योंकि उसके चूतड़ बहुत बड़े और गोल है वो जब भी चलती है तो सबकी नज़र उसकी मटकती हुई गांड पर ही होती है जिसको देखकर हर कोई उसकी मटकती हुई गांड की तरफ आकर्षित हो जाता है, वो ज़्यादातर पटियाला सलवार पहनती है जिसको पहनने के बाद उन कपड़ो में उसकी गांड और भी मस्त दिखती है। वो जब भी सड़क पर चलती है तो सलवार उसकी गांड के बीच की दरार में फंस जाती है तो इसलिए सब उसे ही घूर घूरकर देखते रहते है।

दोस्तों मेरे पापा के दोस्त जब घर आते है तो मेरी माँ उन्हें देखकर रंडियो की तरह सजधजकर तैयार हो जाती है और वो लाल कलर के कपड़ो में बहुत सेक्सी माल लगती है और मेरे भी कई दोस्त भी मेरी माँ की गांड देखकर मुठ मारते थे, यहाँ तक कि मेरा अपना कज़िन भी मेरी माँ को हमेशा गंदी नज़र से देखता था और वो हमेशा मन ही मन उनकी चुदाई करने के सपने देखा करता था, मुझे यह सब बाद में पता चला।

दोस्तों यह बात आज से पांच साल पहले की है जब हम लखनऊ में नये नये रहने के लिए आए थे और हमने किराए पर एक रूम लिया हुआ था। दोस्तों हमारा रूम पहली मंजिल पर था और हमारा मकान मालिक नीचे वाली मंजिल पर रहता था और हमारे मकान मालिक का एक बेटा भी था जिसका नाम रवि था और उसकी उम्र करीब 27 साल थी, लेकिन उसकी अभी तक शादी नहीं हुई थी और वो दिखने में थोड़ा ठीक ठाक था और उनके घर में एक ड्राईवर भी रहता था जिसका नाम राकेश था और उसकी उम्र करीब 44 साल के आसपास थी। दोस्तों मेरी माँ वहां पर भी हमेशा उनके सामने अपना रंडीपन दिखाती थी और मेरे पापा के ऑफिस चले जाने के बाद वो सजसवर के नीचे मकान मालिक के घर पर पहुंच जाती थी और वो उन्हें अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए बहुत कुछ किया करती थी। एक बार की बात है, मैंने रवि को मेरी माँ की गांड पर हाथ रखे हुए भी देख लिया था, लेकिन फिर भी माँ उससे कुछ भी नहीं बोल रही थी क्योंकि शायद वो भी अब उससे इन सभी कामों को करवाने की उम्मीद करती थी और वो भी यही सब अपने साथ करवाना चाहती थी। दोस्तों मेरी माँ की रवि और राकेश के साथ बहुत ज्यादा बात होती थी और वो मेरी माँ से बहुत हंस हंसकर बातें किया करते थे और हमेशा मेरी माँ को गंदी गंदी नजरों से देखा करते थे और उन दोनों लोगो की नज़र मेरी माँ की गांड, बूब्स और उनके गदराए हुए सेक्सी बदन पर ही होती थी जिसकी वजह से मुझे मेरी माँ पर पूरा पूरा शक था कि वो मेरे मकान मालिक से अपनी चुदाई भी करवाती है और एक दिन मेरा शक वो सब कुछ देखकर यकीन में बदल गया जिस दिन मैंने वो सब देखा। दोस्तों एक दिन दोपहर को में बहुत गहरी नींद में सो रहा था और मुझे सोए हुए अभी कुछ देर ही हुई थी कि अचानक से मेरी आँख खुली तो मैंने उठकर देखा कि मेरी माँ उस समय कमरे में नहीं थी और फिर मैंने सोचा कि शायद मेरी माँ नीचे चली गई होगी और मन ही मन यह बात सोचकर में भी नीचे आ गया तो मैंने नीचे आकर मेरी माँ की सिसकियों की आवाज़ सुनी और अब मेरी माँ बहुत ही मीठी आवाज़ में बोल रही थी हाँ थोड़ा और ज़ोर से करो उह्ह्हह्ह प्लीज आईईईई थोड़ा और उह्ह्ह्हह्ह् हाँ और ज़ोर से करो।

फिर मैंने जब खिड़की से उस कमरे के अंदर झांककर देखा तो में वो सब देखकर बिल्कुल दंग रह गया और मेरी आखें फटी की फटी रह गई, मैंने देखा कि अंदर रवि का एक हाथ मेरी माँ के बूब्स पर था और वो मेरी माँ के बूब्स को ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था। माँ ने काले कलर का पटियाला सलवार सूट पहना हुआ था जो कि पूरा जालीदार था और माँ लाल कलर की बिंदी और सिंदूर में पूरी तरह सती सावित्री भाभी की तरह दिख रही थी और उस समय राकेश भी उनके बहुत पास में बैठा हुआ था और वो यह सब देखकर अपना लंड पेंट से बाहर निकालकर अपने एक हाथ से पकड़ कर ज़ोर ज़ोर से हिला रहा था। फिर माँ ने रवि से कहा कि क्या अपनी भाभी के बूब्स को ऊपर से ही दबाओगे या अब उसे नंगा भी करोगे? और फिर यह बात सुनते ही रवि ने तुरंत नीलम का सूट उतार दिया और अब मैंने देखा कि वो अब सिर्फ सलवार और सफेद कलर की ब्रा में थी, लेकिन कुछ ही देर रुकने के बाद उसने माँ की ब्रा को भी उतार दिया जिसकी वजह से अब माँ के मोटे मोटे बूब्स लटकने लगे थे और माँ के झूलते हुए बड़े बड़े बूब्स को देखकर में भी अब बाहर खड़ा खड़ा अपना लंड बाहर निकालकर मुठ मारने लगा।

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मैंने देखा कि माँ के निप्पल थोड़े बड़े उभरे हुए और भूरे कलर के थे और गोरे गोरे बूब्स पर वो भूरे रंग के निप्पल बहुत अच्छे दिख रहे थे और अब मेरी माँ बिल्कुल रांड की तरह दिख रही थी। रवि ने फिर माँ के बूब्स को एक एक करके चूसना शुरू कर दिया था और उसकी वजह से माँ भी अब धीरे धीरे सिसकियाँ ले रही थी और माँ की सिसकियों की आवाज पूरे कमरे में गूंज रही थी। अब रवि माँ से बोल रहा था कि नीलम में आज तुझे कुतिया बनाकर चोदूंगा और तेरी सारी भूख को शांत कर दूंगा, तू बस आज देखती जा में तुझे कैसे कैसे चोदता हूँ तू तो बस चुपचाप अपनी चुदाई के मेरे साथ मज़े लिए जा। तो यह सब देखकर और सुनकर राकेश ने भी अपना लंड अब थोड़ा ज़ोर ज़ोर से हिलाना शुरू कर दिया। रवि ने फिर नीलम की सलवार का नाड़ा खोलकर उसे उतार दिया, उसने काली कलर की पेंटी पहनी हुई थी। अब मुझे माँ की चूत साफ साफ दिख रही थी, वो कई बार चुदकर पूरी तरह फेलकर आकार में बहुत बड़ी हो गई थी और मेरा वो शक़ बिल्कुल सही था कि मेरी माँ मेरे पापा के अलावा भी कई लोगों से बहुत बार अपनी चुदाई करवाती है। दोस्तों मेरी माँ की चूत पर हल्के हल्के बाल थे और रवि से अब बिल्कुल भी रहा नहीं गया। फिर उसने तुरंत अपना मोटा लंड पेंट से बाहर निकाला और फिर उसने अपना लंड चूत पर धीरे धीरे घिसना शुरू किया जिसकी वजह से उसके लंड का टोपा माँ की चूत से बाहर बहते चूत रस से गीला और थोड़ा सा चिपचिपा सा हो गया और फिर कुछ देर बाद उसने अपना चिकना लंड चूत के मुहं पर रख दिया और सही मौका देखकर उसने एक ही जोरदार धक्के से अपना पूरा का पूरा लंड अंदर डाल दिया और वो पूरा फिसलता हुआ मेरी माँ की फेली हुई चूत की गहराईयों में चला गया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

अब माँ की बहुत ज़ोर से चीखने की आवाज़ निकल गई आईईईई आअहह माँ अब पूरी तरह रंडी बन चुकी थी और उसने रवि से कहा कि तू आज अपने इस मोटे लंड से मेरी चूत फाड़ दे उह्ह्ह्ह थोड़ा और ज़ोर से आह्ह्हह्ह् धक्का दे रवि प्लीज पूरा अंदर जाने दे तुझे मेरी कसम, फाड़ दे तू आज मेरी इस चूत को आह्ह्हह्ह हाँ पूरा ज़ोर लगा। माँ के मुहं से यह सभी जोश को बढ़ाने वाली बातें सुनकर रवि अब बिल्कुल सा पागल हो गया और वो माँ के ऊपर पूरा चढ़ गया और उसने फिर से जोरदार झटके मारने शुरू कर दिये और माँ भी अब अपनी गांड को उछाल उछालकर उसका पूरा पूरा साथ दे रही थी और माँ को चुदता हुआ देखकर मेरा लंड भी अब तक पूरी तरह से तनकर खड़ा हो चुका था और अब में भी माँ का नाम लेकर उन्हें अपने सामने चुदता हुआ देखकर अपना लंड थोड़ा ज़ोर से हिलाने लगा। दोस्तों करीब दस मिनट तक चूत की चुदाई ऐसे ही चलती रही। माँ की चूत बहुत ज़्यादा बड़ी थी इसलिए उसका लंड अब बहुत आसानी से फिसलता हुआ पूरा का पूरा अंदर बाहर हो रहा था, लेकिन कुछ देर चूत चोदने के बाद उसने माँ को तुरंत पलट दिया जिसकी वजह से अब माँ के बड़े बड़े गोल चूतड़ साफ साफ दिख रहे थे। फिर रवि ने दोनों चूतड़ को अपने दोनों हाथों से फैलाया तो माँ की गांड साफ साफ नजर आने लगी और उसने अब माँ की गांड में अपनी एक उंगली को डाल दिया।

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माँ तुरंत समझ गई कि आज उसकी गांड भी चुदने वाली है तो माँ ने भी अपनी गांड को अपने दोनों हाथों को पीछे की तरफ लाकर पूरी तरह से पकड़कर फैला दिया। फिर रवि ने तुरंत थोड़ा सा थूक लंड पर और माँ की गांड पर लगा दिया जिसकी वजह से गांड और लंड दोनों ही चिकने होकर चमकने लगे थे। फिर उसने बिना देर किए अपना मोटा लंड माँ की गांड के मुहं पर रखकर एक जोरदार धक्का देकर अंदर डाल दिया। उसने एक झटके में ही पूरा का पूरा लंड माँ की गांड में घुसा दिया था। माँ उस दर्द से एकदम तड़प उठी और अब वो रवि को लंड बाहर निकालने के कहने लगी, लेकिन रवि नहीं रुका वो ज़ोर ज़ोर से लगातार धक्के देकर माँ की गांड को चोदने लगा और यह सब देखकर राकेश भी अपना लंड हिला रहा था और रवि बिल्कुल पागलों की तरह माँ को बिना रुके चोद रहा था और माँ भी रंडियो की तरह उस दर्द की वजह से चीखते, चिल्लाते हुए अपनी गांड उससे बहुत मज़े के साथ मरवा रही थी, लेकिन करीब दस मिनट तक चुदने के बाद रवि झड़ गया और उसने अपना पूरा वीर्य माँ की गांड में ही हल्के हल्के झटकों के साथ पूरा अंदर डाल दिया। मैंने देखा कि रवि का लंड बहुत मोटा होने की वजह से अब माँ की गांड का छेद थोड़ा बड़ा हो गया था और अब तक यह सब देखकर राकेश भी पूरी तरह से गरम हो चुका था और फिर वो भी बोला कि में भी नीलम भाभी की गांड को चोदकर मज़ा लूँगा। उसके मुहं से यह बात सुनकर मेरी माँ तुरंत उससे बोली कि हाँ में तेरी रंडी हूँ चोद दे मुझे, जल्दी से अपना लंड डालकर मुझे चोद दे और तू भी मुझे आज अपना बना ले। फिर राकेश यह बात सुनकर और भी ज्यादा जोश में आकर गरम हो गया और फिर उसने अपना लंड माँ की गांड में एक ज़ोर से धक्का देकर अंदर डाल दिया। माँ की गांड का छेद कुछ देर पहले हुई उस चुदाई से बड़ा हो चुका था और अब उसे भी अपनी गांड को चुदवाने में बहुत मज़ा आ रहा था और वो उससे कह रही थी उह्ह्ह्हह्ह हाँ थोड़ा और अंदर डाल आईईईई प्लीज उफफ्फ्फ्फ़ हाँ थोड़ा सा और अंदर करो।

राकेश ने अब जोश में आकर ज़ोर ज़ोर से धक्के देकर माँ को चोदना शुरू किया और कुछ देर तक लगातार धक्के देकर चोदने के बाद उसने अपना लंड झटका देकर बाहर निकाल लिया और फिर उसने माँ को अपना लंड चूसने को बोला तो माँ उस समय बहुत गरम थी और वो बिना सोचे समझे तुरंत अपनी गांड के अंदर गया हुआ लंड भी अपने मुहं में लेकर चूसने लगी और कुछ देर बाद राकेश माँ के मुहं में ही धीरे धीरे झटके देता हुआ झड़ गया और माँ ने उसका सारा वीर्य पी लिया और उसके लंड को अपनी जीभ से चाट चाटकर साफ किया पूरा चमका दिया। फिर कुछ देर वो तीनों एक साथ थककर लेटे रहे और उसके बाद माँ ने अपने कपड़े पहनने शुरू किए। फिर मैंने देखा कि अभी भी मेरी माँ की गांड से वीर्य टपक रहा था और वो बाहर आने लगी, लेकिन उससे पहले में अपने कमरे में पहुंचकर लेट गया और कुछ देर बाद जब माँ कमरे में पहुंची तो मैंने उनकी बदली हुई चाल से पता लगा लिया कि आज माँ को अपनी गांड में जरुर बहुत दर्द होगा जिसकी वजह से वो इस तरह से चल रही है और उनकी चाल बिल्कुल बदल चुकी थी, लेकिन फिर भी वो अपनी इस गंदी हरकतों से बाज नहीं आई और उसके बाद भी उन्होंने कई बार अपनी चुदाई के मज़े उनके लंड से लिए। दोस्तों यह थी मेरी चुदक्कड माँ की चुदाई की कहानी जिसमें उसको चुदवाने में बहुत मज़ा आया ।।

धन्यवाद …

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