मेरी प्रिय प्रतिमा भाभी

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प्रेषक : मिंटू …

हैल्लो दोस्तों, आज में आप सभी कामुकता डॉट कॉम पर सेक्सी कहानियों को पढ़ने वालों के लिए अपने जीवन का एक सबसे मज़ेदार रोचक किस्सा लेकर आया हूँ और यह मेरे जीवन का एक सबसे अगल अनुभव भी रहा जिसकी वजह से मुझे बहुत कुछ सीखने का मौका मिला। दोस्तों वैसे तो मुझे सेक्स करना और उन सभी कामों में बचपन से ही बहुत रूचि रही है और अब में पिछले कुछ सालों से लगातार सेक्सी कहानियों को पढ़कर मज़े करता हूँ। अब में आप सभी का ज्यादा समय खराब ना करते हुए सीधे अपनी कहानी पर आता हूँ। दोस्तों यह घटना मेरे साथ तब घटी जब में अपने गाँव में जाता था, मेरा चचेरा भाई एक हाई स्कूल में था और मेरे पास के घर के मकानमालिक की एक बहुत सुंदर सेक्सी बहू थी, लेकिन जो बांझ थी। दोस्तों उसका नाम प्रतिमा ठाकुर था और वो थी तो बड़ी पतली दुबली, लेकिन थी वो बड़ी ही मस्त आकर्षक भाभी, वो ऐसी भाभी जिसका कोई जवाब नहीं है। फिर में स्कूल जाते समय अक्सर किताबों की दुकान पर रुकता और वहाँ पर रखी किताबें देखा करता था और उन किताबों  में मुझे ख़ासकर हिन्दी में आज़ाद लोक, अंगड़ाई लोक, हवस की कहानियाँ, मास्टर मौलाना जैसी किताबों का पोस्टर देखना अच्छा लगता था, लेकिन मेरी कभी उन्हें लेने की हिम्मत नहीं होती थी।

दोस्तों मेरा एक फ्रेंड था उसका नाम संजय था, उसके साथ एक बार में उसके घर चला गया तब वहाँ उसने मुझे वो किताब पढ़ने के लिए दे दी। फिर मैंने उसको घर में छुपकर पढ़ी, मुझे वो बहुत अच्छी लगी, उनको पढ़कर मेरा लंड खड़ा हुआ और मुझे दर्द बड़ा हुआ और भी बहुत कुछ हुआ, लेकिन मेरा मन बड़ा खुश था वो सब करके मेरा मन खुशी से झूम उठा था पहली बार ना जाने क्यों में बड़ा ही उत्साहित हुआ था? फिर कुछ दिनों में मैंने वो किताबें लगातार पढ़नी शुरू कर दी और नई किताबे खरीदी भी और तब मुझे लंड-चूत-बूब्स-निप्पल-गांड जैसे अंगो के बारे में पूरी तरह विस्तार से पता चला। अब मेरा औरतों और लड़कियों को देखने का नजरिया एकदम बदल सा गया था, क्योंकि उसके पहले में सबको बहन ही बनाता था, बस यहीं से यह मेरी आज की कहानी शुरू होती है। दोस्तों उन दिनों हमारे घर में वी.सी.आर था और मकानमालिक के बड़े बेटे से मेरी बहुत अच्छी दोस्ती थी और वो हमारे घर में फिल्म देखते थे। एक दिन में एक फिल्म लेकर आया वो एक इंग्लिश फिल्म थी उस फिल्म में तीन नंगे द्रश्य थे। दोस्तों मुझे पहले से ही पता था कि इंग्लिश फिल्म में सेक्स और चूमने के द्रश्य तो होते ही है, लेकिन प्रतिमा भाभी को यह सब पता नहीं था।

फिर में घर आया तो उस समय मेरी मम्मी घर में नहीं थी और घर की चाबी भाभी के पास थी, मम्मी एक रात के लिए मेरी मौसी के घर गयी थी और जाने से पहले मम्मी ने मुझसे कहा था कि ख़ाना और तेरा वी.सी.आर पास वाले कमरे में रखे है। फिर मैंने वहाँ जाकर अपने लिए खाना लिया और में वी.सी.आर पर एक फिल्म लगाकर चालू करने लगा। तभी अचानक से भाभी आ गई और वो मुझसे पूछने लगी क्यों क्या लगा रहे हो मिंटू? और मैंने उनको जवाब दिया।

में : में फिल्म देख रहा हूँ यह एक इंग्लिश फिल्म है यह फिल्म बहुत सारे सांपो की फिल्म है।

भाभी : क्यों क्या यह नागिन जैसी है?

में : नहीं इसमें एक नाग है जिसके तीन फन है और वो सभी को मारता है।

भाभी : अगर तुम्हे ऐतराज ना हो तो क्या में भी तुम्हारे साथ एक बार इसको देख लूँ।

में : नहीं आप इसको मत देखो, कहीं आप इसको देखकर डर गयी तो और वैसे भी इसमें कभी-कभी कुछ गलत भी होता है।

अब भाभी कहने लगी कि जब तुम इसको देखकर नहीं डरोगे, तो में क्यों डरूंगी? चलो अब तुम इसको लगाओ और फिर मैंने उनके कहने पर उस फिल्म को शुरू कर दिया और में खाना खाते हुए वो फिल्म देखने लगा। फिर कुछ देर बाद उस फिल्म में एक द्रश्य आ गया, जिसमे एक लड़की नंगी होकर नहा रही थी और एक सांप उसके पास आता है और उसको मार देता है, उसमे वो सांप उस लड़की के बूब्स पर काटता है उस द्रश्य को देखकर भाभी मुझसे कहने लगी कि तुम हटाओ इसको यह तो बड़ी गंदी फिल्म है। फिर मैंने उनको कहा कि नहीं आप कमरे से बाहर चली जाओ मुझे देखने दो यह एक बड़ी मज़ेदार फिल्म है, आपकी समझ में नहीं आएगी। अब भाभी कहने लगी कि यह कैसी फिल्म है? जिसमे लड़की नहा रही है और वो पूरी नंगी है। फिर मैंने कहा कि भाभी आप जाओ यार मुझे देखने दो, लेकिन तब भी भाभी बाहर नहीं गयी और वो भी फिल्म को बड़े ध्यान से देखने लगी। फिर करीब दस मिनट में दोबारा से एक चूमने वाला द्रश्य आ गया और वो सब देखकर भाभी कुछ नहीं बोली और आधे घंटे के बाद एक नंगा चूमने वाला द्रश्य आ गया तब भी वो चुप ही रही।

फिर भी भाभी ने पूरी फिल्म देखी और आखरी में भाभी डर भी गयी, जब सांप को मारते है। फिर उस फिल्म को पूरा देखने के बाद भाभी मुझसे कहने लगी कि हाए मिंटू बाबू कितनी गंदी फिल्म थी, एकदम गंदी, तुम ऐसी फिल्म मत देखा करो, लेकिन अब भाभी मुझसे अपनी आंखे नहीं मिला रही थी और कुछ देर बाद वो चली गई अपने काम करने लगी। दोस्तों भाभी मुझे कभी-कभी पढ़ाती भी थी, एक दिन में कुछ याद कर रहा था और वो सेक्स का पाठ था, उस समय भाभी मुझे पढ़ा रही थी और वो जो ब्लाउज पहने थी, वो सफेद रंग का था बिल्कुल भाभी के बदन की तरह सफेद, गोरा उजला कपड़ा पारदर्शी था और उसमे छोटे छोटे छेद भी थे, वो उसके नीचे ब्रा भी नहीं पहने थी और मुझे उसमे से भाभी की निप्पल साफ-साफ नजर आ रही थी। फिर मैंने भाभी से पूछा कि भाभी सेक्स में क्या होता है? और इस की वजह से मेडक बच्चे कैसे पैदा कर देते है? अब भाभी मेरे मुहं से यह सब सुनकर बहुत घबरा सी गयी और वो संभलकर बोली कि यह एक क्रिया है जिसको वो दोनों मिलकर करते है और उसके बाद मेडक अंडे देता है। अब मैंने तुरंत उनको पूछा कि यह कैसे होता है? तब भाभी बोली कि तुम्हे विस्तार से पता करना है तो किताब को खोलकर उसमे वो सब पढ़ो, क्योंकि उसमे सब कुछ लिखा है।

अब मैंने उनको पूछा क्या आदमी भी सेक्स करके अंडे देता है? तब भाभी यह बात सुनकर हंसी और वो बोली कि नहीं पागल औरतें बच्चे पैदा करती है और उन्होंने मेरे गाल पर नोच लिया और बोली कि तुम बड़े बेवकूफ हो यार। फिर मैंने बहुत प्यार से आग्रह करते हुए कहा कि भाभी प्लीज बताइए ना कैसे आदमी सेक्स करता है? तब भाभी बोली कि हट क्या यह भी पूछा जाता है? जब तू बड़ा होगा तब तुझे यह सब कुछ अपने आप पता चल जाएगा। फिर मैंने कहा कि भाभी आपने क्या कभी सेक्स नहीं किया? आपकी तो शादी भी हो चुकी है, लेकिन आपने अभी तक कोई बच्चा नहीं दिया। अब भाभी मेरे मुहं से यह बात सुनकर एकदम भौचक्की रह गयी और उनके चेहरे पर दुख साफ साफ नजर आने लगा और फिर वो नीचे चली गयी। फिर उसके बाद मैंने उनको एक सप्ताह तक नहीं देखा और जब में उनके पास पढ़ने गया तब उनके नौकर ने मुझे वापस घर भेज दिया। एक दिन में एक इंग्लिश फिल्म लेकर आया उसके बाद मैंने भाई साहब को बुला लिया और साथ में भाभी भी आ गई। दोस्तों उन दिनों सर्दियों के दिन थे और इसलिए हम सभी बिस्तर में बैठे हुए थे, लेकिन उस समय हम सभी अलग-अलग पलंग पर बैठे थे। अब भाभी मेरे और भाई साहब के बीच में बैठी हुई थी, हम सभी वो फिल्म देख रहे थे और कुछ देर बाद हम दोनों के बीच में भाभी लेट गई।

अब रज़ाई में ही भाभी के पैरों पर से साड़ी हट गयी, में फिल्म देख रहा था और कुछ देर बाद में भी लेट गया और मैंने लेटे-लेटे ही करवट ली। फिर तब मैंने देखा कि भाभी अपनी दोनों आँखों को बंद करके सो रही है, में थोड़ा नीचे हुआ तो मेरा पैर भाभी के घुटनों से छु गया और उस समय मुझे भाभी के नंगे गरम शरीर का आभास हुआ। फिर मैंने थोड़ी हिम्मत करके मेरा एक पैर ऊपर किया उसकी वजह से उनकी साड़ी अब जांघो तक आ चुकी थी, लेकिन भाभी की तरफ से मुझे कोई भी हलचल नजर नहीं आई जिसकी वजह से मेरी हिम्मत पहले से ज्यादा बढ़ गई। अब में अपना एक हाथ अंदर करके भाभी की जांघो पर अपना एक हाथ रखकर सहलाने लगा, भाभी उस समय बड़ी गहरी नींद में थी, इसलिए उनको कुछ पता नहीं चला, लेकिन में उनकी जांघे सहलाते हुए ही कुछ देर बाद झड़ गया और उठकर बाथरूम में चला गया और वहाँ पर मैंने पेशाब कर दिया, लेकिन कुछ देर बाद मैंने कुछ और देखा। दोस्तों में वो सब देखकर बड़ा चकित हुआ, क्योंकि जब में पीछे मुड़ा तब मैंने देखा कि भाभी मेरे पीछे ही खड़ी थी और वो मुझे घुर रही थी। अब में एकदम से घबरा गया, तब भाभी आगे आई और वो मुझसे कहने लगी क्यों? क्या हो रहा था? और क्या हो गया? फिर मैंने कहा कि कुछ नहीं भाभी।

अब भाभी कहने लगी  कि अभी तुम मेरे पैरों को सहला रहे थे, चलो में अभी तुम्हारी शिकायत करती हूँ। फिर में वो बात उनके मुहं से सुनकर बड़ा घबरा गया बहुत उदास था और में उनको माफ करने के लिए कहने लगा। तभी भाभी कहने लगी कि ठीक है आगे से ऐसा नहीं होना चाहिए, क्या बात है? जो तुम इतना डर गये हो, कुछ गड़बड़ है क्या? तब मैंने कहा कि भाभी मेरा पेशाब निकल गया, लेकिन पता नहीं यह इतना कैसे चिपचिपा है? फिर भाभी मुझसे कहने लगी कि लाओ दिखाओ। फिर मैंने कहा कि में आपको कैसे दिखाऊँ? मुझे शरम आती है। अब भाभी बोली कि जब मेरे पैरों को तुम सहला रहे थे तब तुम्हे शरम नहीं आ रही थी और अब शरम आ रही है, चल दिखा नहीं तो उनको बुलाऊं क्या? तब मैंने तुरंत अपना अंडरवियर उतारकर उनको दिखा दिया। फिर भाभी ने अपना एक हाथ मेरे लंड पर लगाया और मेरा लंड पकड़कर देखा तो वो वीर्य से सना हुआ चिपचिपा था। फिर भाभी ने उसको साफ किया, उसके बाद मेरी अंडरवियर को उतारकर धो दिया और में एक नेकर पहनकर वापस आ गया। फिर थोड़ी देर के बाद भाभी वापस आई और वो मेरे पास लेट गयी, लेकिन अब वो जाग रही थी, लेकिन मैंने उनको छुआ तक भी नहीं और फिर फिल्म ख़त्म हो गयी और भाभी-भाई साहब चले गये।

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फिर अगले दिन भाभी मेरे कमरे में ऊपर आ गई, में उस समय एक सेक्सी कहानियों की किताब पढ़ रहा था, तब भाभी ने मुझे देख लिया और पकड़ भी लिया और वो मुझसे पूछने लगी यह क्या पढ़ रहे हो? और भाभी मुझे डराने धमकाने लगी, तब में बहुत डर गया। अब भाभी मुझसे बोली कि बताओ और कितनी किताबें है? कौन-कौन सी किताबें है तुम्हारे पास? तब मैंने वो सारी किताबें निकालकर उनको दिखा दी, भाभी ने वो सब मुझसे ले ली और वो अपने घर आ गयी। फिर में डर के मारे सो गया कि अब मुझे मार पड़ने वाली है, भाभी मम्मी को बता देगी और मेरी चोरी पकड़ी जाएगी, लेकिन सब इसका उल्टा हुआ। फिर भाभी शाम को ऊपर आई और मुझे उन्होंने अपने पास में पढ़ने को बुला लिया, में डरते हुए नीचे चला गया, आज भाभी जरूरत से ज़्यादा खुश थी और बहुत सुंदर लग रही थी। फिर में नीचे गया और किताब खोलकर पढ़ने लगा। फिर भाभी मेरे पास आई और बोली कि क्या पढ़ रहे हो मिंटू? तब मैंने कहा कि विज्ञान। फिर भाभी बोली और तुम्हे वो आज़ाद लोक, अंगड़ाई लोक कैसी लगती है? तब में उनके मुहं से वो बात सुनकर शरमा गया और बोला कि अच्छी लगती है। अब भाभी बोली कि और जो मास्टर मौलाना है वो और जिसमे फोटो है वो फोटो कैसी लगती है? अब मैंने कहा कि बहुत सुंदर और अच्छी लगती है, खासकर वो जो पत्तों में फोटो है।

अब भाभी मेरे मुहं से वो बात सुनकर मुस्कुराने लगी और वो बोली कि बहुत आवाज़ निकल रही साहब की, कल बंद हो गई थी आज़ खुल गयी है। अब मैंने कहा कि कुछ नहीं। फिर भाभी बोली कि में कैसी लग रही हूँ? यह बिल्कुल अज़ीब सा सवाल था, लेकिन में बोला कि भाभी आप बहुत अच्छी लगती हो और प्यारी भी हो। अब भाभी बोली कि क्या मेरे पैर सहलाना तुम्हे अच्छा लगता है? तब मैंने कहा कि हाँ। फिर भाभी ने अपनी साड़ी को उठा दिया और वो मुझसे बोली कि लो मिंटू सहलाओ और मेरा हाथ पकड़कर उन्होंने अपने पैरों पर रख दिया, में उनके पैरों को सहलाने लगा। फिर कुछ देर उनके दोनों पैरों को सहलाते हुए मैंने महसूस किया कि भाभी गरम हो गयी थी और वो मुस्कुरा रही थी। अब मुझे भी बड़ा मस्त मज़ा आ रहा था और मेरी गति बढ़ चुकी थी। फिर भाभी ने पूछा क्यों मिंटू बाबू क्या कभी तुम्हारा मन करता है कि अपनी भाभी को नंगी देखो? तब मैंने जवाब दिया कि भाभी करता तो है और कभी-कभी आपको नहाते हुए सीढियों से झाँककर भी मैंने देखा है। अब भाभी वो बात सुनकर शरमा गयी और बोली कि हाए दैय्या तुमने मुझे नंगा देखा है और मुझे पता ही नहीं चला, यह कैसे हुआ? तब मैंने कहा कि अरे कुछ दिखा ही नहीं था बस आप पेशाब करने के लिए बैठी थी और मैंने देख लिया, लेकिन ऊपर से कुछ नहीं दिखा था।

फिर भाभी बोली क्या तुम मुझे नंगी देखना चाहते हो? क्या सही में तुम्हारी भाभी इतनी सुंदर है? तब मैंने शरमाते हुए कहा कि जी भाभी। अब भाभी बोली कि पहले तुम मुझसे कहो कि भाभी आप मुझे अपना नंगा शरीर दिखा दो, तब में तुम्हे दिखा दूंगी, तुम मेरा कुछ छीन थोड़ी लोगे। फिर मैंने कहा क्या सच भाभी जी क्या आप मुझे नंगी दिख सकती हो? क्या आप अपने कपड़े मेरे आमने उतार दोगी? सही में प्लीज़ भाभी में आपको नंगी देखना चाहता हूँ, क्या में आपको नंगी कर सकता हूँ? प्लीज़ भाभी, प्लीज़ में आपको नंगी करना चाहता हूँ। अब भाभी खिलखिलाकर हंसने लगी और वो बोली कि अरे मेरे भोले मिंटू देवर तुम कहो तो लो पैर छोड़ो चलो करो अपनी प्रतिमा भाभी को नंगी। अब बस मेरा इतना सुनना था कि में भाभी से लिपट गया और उनकी छाती से चिपक गया। फिर भाभी ने मुझे कसकर अपनी छाती से चिपका लिया और मेरा मुँह अपने बूब्स के बीच में दबाकर वो मुझसे बोली कि जैसे चाहे अपनी भाभी को देखो और नंगा करो, लेकिन तुमको कसम है चोदना नहीं। फिर मैंने कहा कि चोदना क्या होता है? तब भाभी बोली कि वो भी सिखाऊँगी, अभी सिर्फ़ नंगा करो और सहलाओ और बस मज़ा लो। फिर मैंने भाभी की साड़ी को उतार दिया, जिसकी वजह से अब भाभी मेरे सामने ब्लाउज और पेटीकोट में थी, दूध सा उनका सफेद रंग और नीले पेटीकोट और ब्लाउज में भाभी बड़ी सेक्स नजर आ रही थी।

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फिर मैंने भाभी के ब्लाउज का हुक खोला एक एक करके चार आखरी में पाँचवाँ और फिर मुझे दोनों बूब्स के बीच की लकीर साफ नजर आ गई और अब मेरी आँखों के सामने दो पहाड़ियों के बीच की खाई जैसा नजर आने लगा था। अब मैंने देखा कि उन्होंने अंदर काले रंग की ब्रा पहनी थी, जो जालीदार थी और पारदर्शी भी थी, उसमे से उनके बूब्स बाहर आ रहे थे, वो क्या मस्त द्रश्य था? और बड़ा ही मनमोहक मज़े भरपूर नजारा था। फिर भाभी घूम गयी और बोली कि चलो जल्दी से ब्रा का हुक तो खोलो। फिर मैंने उनकी ब्रा का हुक भी खोल दिया, भाभी ने बिना घूमे अपनी ब्रा को उतारा दिया और वो ब्रा मुझे हाथ में दे दी। अब मैंने उनकी ब्रा पकड़ी और में उसको टटोलने लगा। फिर भाभी ने पीछे मुड़कर देखा तो वो हंस पड़ी और बोली कि मेरे भोले राजा इसमें कुछ नहीं है, जो भी है मेरे पास है लो देखो जो देखने की चीज है। अब मेरे सामने दो गोल-गोल लड्डू जैसे मस्त गोरे सुंदर गोरे-गोरे प्यारे से बूब्स मुझे नजर आ रहे थे, जो बहुत कसे हुए टाईट भी थे और उनकी निप्पल एकदम खड़ी हुई थी, दोनों बूब्स में जरा सा भी लचीलापन नहीं था, मेरी 35 साल की भाभी पूरी मस्त माल थी। फिर मैंने उनकी तरफ अपना एक हाथ बढ़ा दिया। तब भाभी बोली कि नहीं पहले पेटीकोट तो खोलो यार।

अब मैंने उनके पेटीकोट का नाड़ा बाहर निकाला, जिसमें उनके कुछ बाल भी खींच आ गये। फिर भाभी बोली कि आराम से निकाल नहीं तो मेरे बाल टूट जाएँगे। अब मैंने उनके पेटीकोट का नाड़ा खोला, तो उनका पेटीकोट नीचे फिसल गया और भाभी एकदम नंगी मेरे सामने थी, उनकी चूत पर बाल ज़्यादा थे और उनकी चूत मुझे नजर नहीं आ रही थी, भाभी की चमड़ी एकदम दूध जैसी गोरी थी बस उनके निप्पल हल्के भूरे थे, वरना बेदाग भाभी एकदम इंग्लिश फिल्म की हिरोइन लग रही थी। अब मेरा लंड वो सब देखकर एकदम टाईट हो चुका था और में अपना लंड कसकर पकड़े था और हल्के से दबा भी रहा था। तभी भाभी बोली कि मेरे पास आओ, में भाभी के पास चला गया। अब भाभी ने मेरे सारे कपड़े उतार दिए और मुझे भी नंगा करके अपने से चिपका लिया और मुझे पलंग पर लेटा दिया। अब में लेटा ही था कि मेरे लंड ने एक धार मार दी, जो भाभी की झाटो पर जा गिरी। तभी भाभी बोली कि लो तुम तो अभी से ही निकल लिए और जगह भी देखकर मारी है। फिर भाभी अपने ब्लाउज से मेरा लंड और झाटे साफ करने लगी, साथ-साथ मेरा लंड भी दबा रही थी। अब में अभी तक कुछ समझ ही नहीं पा रहा था कि तभी भाभी ने मेरा लंड पकड़ा और अपने मुँह में डाल लिया। अब धीरे धीरे मेरा पारा चढ़ गया था और मेरे मुँह से सिसकियों की आवाज निकलने लगी थी।

फिर भाभी मेरा लंड चूसती रही करीब दस मिनट उन्होंने मेरा लंड चूसा और लगातार चूसते-चूसते मेरा लंड एक बार फिर से उनके मुँह में ही झड़ गया। अब भाभी बोली कि थोड़ा रोका तो करो सब मेरे मुँह में ही कर दिया। फिर मैंने कहा कि भाभी आप ऐसा कर रही हो तो मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा, क्या में आपका लंड चूस सकता हूँ? भाभी बोली कि हट औरतों के लंड नहीं चूत होती है और उसको चूसना है तो, लो चाट लो, लेकिन पहले क्या मेरा दूध पीओगे? तब मैंने शरमाते हुए कहा कि हाँ। फिर भाभी मेरे पास लेट गयी और अपने एक निप्पल को मेरे मुँह में डाल दिया, में लगातार बारी-बारी से उनके दोनों बूब्स को चूसता रहा। अब भाभी कहने लगी कि जरा मुझे सहलाओ तो और में उनके शरीर को अपने हाथों से रगड़ने लगा, में इतनी तेज़ी से दबा रहा था और सहला रहा था कि कभी-कभी भाभी चीखने चिल्लाने लगती और तेज़ मिंटू और तेज़। अब में लगातार उनके बूब्स को चूस रहा था कि तभी भाभी ने मेरा एक हाथ अपनी चूत पर रखा और बोली कि अब इसको रगड़ डालो, में उनकी चूत को रगड़ने लगा। अब भाभी मस्त होने लगी थी और वो अपने मुहं से सेक्सी जोश भरी आवाज़ें भी निकालने लगी थी आह्ह्ह ऊह्ह्ह मेरी चूत में उंगली करो मिंटू उंगली डालो चूत में जल्दी करो कसकर करो ऊऊईईई आहह आईईईईई कसकर रगड़ो नोचो ना काट डालो।

अब में लगातार उनकी चूत में अपनी उंगली को अंदर बाहर कर रहा था और फिर करीब दस मिनट की उंगली से चुदाई ने उनको दोबारा से झड़ने पर मजबूर कर दिया और अब मेरा हाथ उनके झड़ने की वजह से गीला हो गया। फिर भाभी ने मेरे होंठो पर चूमना शुरू किया और उसके बाद उन्होंने मुझसे पूछा क्यों मज़ा आया ना। अब मैंने उनको कहा कि हाँ मुझे बहुत ज्यादा मज़ा आया और फिर मैंने भाभी से पूछा क्या में आपकी पप्पी ले सकता हूँ? तब भाभी बोली कि हाँ क्यों नहीं? ले लो जितनी चाहे और जहाँ चाहे। अब मैंने तुरंत भाभी के होंठो को चूमना शुरू किया और लगातार में उनको चूमता ही रहा। फिर करीब पंद्रह मिनट के बाद में दोबारा से झड़ गया। अब इस बार भाभी मुझसे बोली कि हट पगले तू जब देखो तब धार मार देता है, अब मुझे तेरा इंतजाम करना पड़ेगा और भाभी बोली कि जब भी किसी को चूमते है तब उसको चूसकर करते है और फिर भाभी ने मेरे होंठो को दो मिनट तक चूसा और बोली कि ऐसे करते है। फिर मैंने कहा कि में भी ऐसे पप्पी लूँगा और अब मैंने तुरंत भाभी के होंठो को अपने मुँह में ले लिया और पूरा पांच मिनट तक चूसा। फिर जब मैंने उनके होंठो को छोड़ा, तब भाभी बोली कि अबे ऐसे मत किया करो साँस रुक जाएगी।

अब मैंने कहा कि लेकिन भाभी मुझे ऐसा करना अच्छा लगा, मेरे मुहं से यह बात सुनकर भाभी हंस पड़ी और वो बोली क्यों मज़ा आ गया ना, अब तो मुझे तुम दोबारा तंग नहीं करोगे ना? तुम्हे जब भी मुझसे प्यार करना हो दिन में आ जाना और मुझे नंगा करके प्यार करना, चलो अब पढ़ाई करते है। फिर मैंने कहा कि भाभी यह तो बताओ कि चोदा कैसे जाता है? तब भाभी बोली कि यह जो चूत है ना इसमे जो यह लंड तुम्हारे पास है उसको धक्के से अंदर किया जाता है और फिर लगातार धक्के मारकर जो धार तुम मारते हो उसको अंदर गिरा देते है, उसको चोदना या चुदाई कहते है। फिर मैंने बिना देर किए उनकी चूत के होंठो पर अपना लंड रख दिया और मना करने के बाद भी एक ही बार में ज़ोर का धक्का लगाकर अपना पूरा लंड मैंने चूत के अंदर डाल दिया और मैंने उनकी सिर्फ़ पांच मिनट तक चुदाई की होगी उसके बाद में उनकी चूत के अंदर ही झड़ गया। दोस्तों मैंने भाभी के चेहरे को देखा वो बहुत खुश नजर आ रही थी और में भी पहली बार वो सब करके बड़ा संतुष्ट प्रसन्न हुआ, क्योंकि वो मेरा पहला अनुभव किसी चूत में अपने लंड को डालकर मज़े लेने का पहला मौका जो था।

दोस्तों में अब भी सूरत में ही रहता हूँ, लेकिन अब वो लोग हमारे यहाँ नहीं रहते और में उनके चले जाने की वजह से बिल्कुल अकेला हो गया हूँ। दोस्तों यह था मेरा पहला सच्चा सेक्स अनुभव का सारा सच पूरा विस्तार से जिसको मैंने बड़ी मेहनत से लिखकर तैयार किया है, मुझे उम्मीद है कि यह आप सभी को जरुर पसंद आया होगा। अब मुझे जाने की आज्ञा दें में जरुर दोबारा अपने किसी अनुभव कोई चुदाई के साथ जरुर चला आऊंगा आप सभी की सेवा में ।।

धन्यवाद …

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