स्कूटी चलाना सिखाते हुए चुदाई

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प्रेषक : एश …

हैल्लो दोस्तों, आप सभी कामुकता डॉट कॉम के पाठक इसको चाहने वालों कैसे हो? दोस्तों में गुजरात के जुनागढ़ शहर में रहता हूँ और में 26 साल का हूँ, मेरे लंड का आकार 6 इंच है। दोस्तों आज में जो कहानी आप सभी को सुनाने जा रही हूँ वो मेरे पड़ोस में रहने वाली भाभी और मेरी है, यह बात आज से करीब 6 महीने पहले की एक सच्ची घटना है और तब मेरे साथ घटित हुई, जब हमारे पड़ोस में वो नये पड़ोसी रहने आए थे। दोस्तों उन भैया का नाम अमित और उनकी पत्नी का नेहा था, अमित भैया उस समय करीब 30 साल के थे और उनकी पत्नी नेहा 26 साल की होगी। फिर जब वो लोग अपने घर का सामान ट्रक से नीचे उतार रहे थे, तब में भी कुछ देर उनको दूर खड़े होकर देखने के बाद उनकी मदद करने के लिए उनके पास चला गया और मैंने पहले दिन ही एक अच्छा पड़ोसी होने के नाते से अपने नये पड़ोसी की मदद करना शुरू कर दिया। फिर मेरे उस व्यहवार और मेहनत को देखकर वो दोनों पति-पत्नी बहुत खुश हुए और तब से ही मेरी और अमित की एक बहुत अच्छी पक्की दोस्ती हो गयी। फिर हमारे बीच हंसी मजाक बाहर घूमना फिरना पहले दिन के बाद से ही शुरू हो गया था और मैंने उनके हर एक काम को किया कभी मना नहीं किया, क्योंकि वो लोग इस शहर में अभी नये थे और में अमित की पत्नी को हमेशा भाभी कहकर बुलाता।

दोस्तों वो दिखने में बहुत सुंदर थी और उसके बूब्स बहुत बड़े आकार के बिल्कुल सुडोल बड़े ही आकर्षक थे, जिसकी वजह से जब भी में उसको देखता मेरा लंड तो तुरंत ही एकदम टाइट होकर खड़ा जाता था और में उसको अपनी तिरछी नजर से देखा करता, उसको छूने के नये नये बहाने सोचा करता। अब में कैसे भी करके उसके गोरे सेक्सी बदन को छूकर महसूस करना चाहता था और में अमित को उसके कहने पर ब्लूफिल्म की सीडी बाजार से खरीदकर लाकर देता था। फिर उसके बाद अमित और नेहा हर कभी रात को एक साथ वो ब्लूफिल्म देखते और जैसा उस फिल्म में चुदाई करते हुए देखते वो दोनों वैसे ही सेक्स करते थे और उन दोनों को अलग अलग तरह से सेक्स करने का बहुत शौक था। दोस्तों वो बहुत ही खुले विचारों के थे, इसलिए में भी कई बार नेहा से मजाक करते हुए पूछ लेता था कि क्यों कल की फिल्म कैसी लगी तुम्हे, क्यों मज़ा आया कि नहीं? तब वो पहले थोड़ा सा शरमाती और फिर वो मुझसे कहती कि हाँ मुझे वो बहुत अच्छी लगी। अब उसका यह खुला हुआ जवाब सुनकर मेरी हिम्मत और ज्यादा बढ़ जाती और कई बार जब अमित घर पर नहीं होता, तब में जानबूझ कर नेहा को ब्लूफिल्म की सीडी देता जिनको वो देखकर बड़ी खुश रहती। फिर कई बार तो अमित में और नेहा एक साथ में बैठकर सेक्स के बारे में सेक्सी बातें भी करते थे।

एक दिन अमित एक नई स्कूटी लेकर आया था, लेकिन सबसे बड़ी समस्या उन दोनों के बीच में यह थी कि नेहा को गाड़ी चलना नहीं आता था और अमित को पूरा दिन अपने ऑफिस में बहुत काम रहता था, इसलिए वो हमेशा अपने कामों में बड़ा ही व्यस्त रहता था। फिर कई दिन बीत जाने के बाद भी वो वैसे ही व्यस्त ही रहा और इसलिए वो अपनी पत्नी को गाड़ी चलाना सिखाने के लिए बिल्कुल भी समय नहीं निकाल पा रहा था। अब इस बात की वजह से एक दिन उन दोनों पति-पत्नी में हल्के सी लड़ाई भी हुई। एक दिन अमित ने अपनी उस परेशानी के बारे में मुझसे कहा और वो मुझसे कहने लगा कि यार में अपने कामों की वजह से बिल्कुल भी फ्री नहीं रहता हूँ प्लीज तुम ज़रा नेहा को स्कूटी चलाना सीखा देना में उसको कह दूंगा कि मैंने तुमसे यह काम करने के लिए कहा है और वो तुम से मना नहीं करेगी। अब मैंने उन दोनों की उस समस्या को समझकर तुरंत उसको कहा कि हाँ ठीक है, में उसकी यह बात सुनकर मन ही मन बहुत खुश था, क्योंकि में खुद भी हमेशा ऐसे कोई अच्छे मौके की तलाश में था और वो अब मुझे मिल ही गया। फिर उसी शाम को में खुश होता हुआ नेहा के घर चला गया और तब मैंने जाकर देखा कि नेहा ने उस समय बिना बाह का ब्लाउज पहना हुआ था और उसका पेटीकोट नाभि के नीचे बंधा हुआ था।

अब उसकी वजह से उसकी गोरी गोरी और गहरी नाभि मुझे पूरी साफ नजर आ रही थी, मेरा लंड तो उसको देखकर ही तनकर खड़ा हो गया। फिर मैंने स्कूटी को बाहर निकाला और नेहा बड़ी खुश होकर मेरे पीछे बैठ गई, उसको आज स्कूटी चलाने का जूनून था और फिर कुछ देर बाद हम दोनों एक खुले मैदान में चले गये। अब में नेहा को लिवर, ब्रेक के बारे में बता रहा था, लेकिन नेहा को मेरे पीछे होने की वजह से कुछ भी दिखाई नहीं दे था, जिसकी वजह से वो अब मेरे ज्यादा करीब आ गयी और जैसे ही वो मेरे करीब आई उसके बड़े आकार के बूब्स मेरी पीठ को छु गये। अब उसकी वजह से मुझे तो जैसे करंट सा लग गया, वाह क्या मुलायम बूब्स थे? उसकी वजह से मेरा लंड तो पूरा खड़ा हो गया और अब वो मुझसे कुछ ज्यादा ही सटकर बैठ गई थी। फिर में उसको बता रहा था, वो बड़े ही ध्यान से सीख रही थी और उसका पूरा ध्यान मेरी बातों पर ही था। अब में उसे ब्रेक के बारे में समझा रहा था और बारी बारी से में ब्रेक भी लगा रहा था, जिसकी वजह से उसके बड़े आकार के बूब्स मेरी कमर से टकरा रहे थे, जिनको छुकर में बहुत अच्छा महसूस कर रहा था। फिर कुछ देर बाद नेहा ने अपना एक हाथ मेरी जाँघ पर रख दिया मुझे तो उसके मुलामय हाथ का स्पर्श मेरी जांघ पर बहुत अच्छा लगा।

फिर अचानक से एक गढ्ढा आ गया और मेरा नियन्त्रण खोने लगा था, जिसकी वजह से उसका हाथ मेरी जाँघ से नीचे सरककर मेरे लंड को छु गया, जो उस समय पूरा खड़ा हुआ था। दोस्तों में तो उसकी वजह से बहुत घबरा गया, लेकिन फिर मैंने नेहा की तरफ देखा तो वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुरा रही थी और कुछ दूर चलने के बाद मैंने गाड़ी को रोक दिया और अब मैंने नेहा को आगे बैठने के लिए कहा और उसको स्कूटी चलाने दिया। अब नेहा चलाने से पहले ही बहुत घबरा रही थी और वो उसी समय मुझसे कहने लगी कि तुम मुझे पीछे से पकड़े रहना, क्योंकि मुझे गिरने से बहुत डर लग रहा है। फिर मैंने उसको कहा कि आप मेरे होते हुए बिल्कुल भी चिंता मत करो में हूँ ना फिर आप क्यों इतना डरती हो? आप बस चलाने पर अपना ध्यान दो। अब में उसके पीछे बैठ गया उसके बाद पीछे से मैंने नेहा ने जो हेंडल को पकड़ा था, मैंने उसके हाथ के ऊपर अपने हाथ रख दिए और मेरे ऐसा करने की वजह से मेरा पूरा शरीर उसके ऊपर झुक गया और फिर मेरा खड़ा लंड अब उसकी गांड में घुस गया। अब जैसे वो धीरे धीरे स्कूटी को आगे बढ़ाती और फिर उसके बाद अचानक से बार बार ब्रेक लगाती उसकी वजह से मेरा लंड अंदर बाहर हो रहा था और मुझे तो वो सब बहुत अच्छा लग रहा था।

फिर मैंने कुछ देर बाद अपने हाथ को गाड़ी हेंडल पर से हटा दिए और उसकी गोरी मखमल जैसी कमर पर रख लिया, लेकिन जैसे ही कुछ देर बाद नेहा ने ब्रेक लगाया, मेरा एक हाथ उस पतली चिकनी कमर से फिसलकर आगे की तरफ चला गया। अब उसकी वजह से मेरी ऊँगली नेहा की नाभि में चली गई और तब मैंने महसूस किया कि वाह क्या नरम मुलायम नाभि थी उसकी? मेरा हाथ तो वहां का वहीं रह गया। फिर थोड़ी देर के बाद नेहा ने अपने एक हाथ से मुझे एक हल्का सा झटका दे दिया, तभी मुझे महसूस हुआ कि मेरी उंगली अभी भी नेहा की नाभि में है। फिर मैंने झट से अपने हाथ को एक बार फिर से उसकी कमर पर रख दिया, लेकिन नेहा अब धीरे धीरे मुस्कुरा रही थी, शायद उसको भी अब मेरा यह सब करना अच्छा लग रहा था। अब कुछ देर और उसके साथ समय ऐसे ही बिताकर में उसके साथ वापस उसके घर आ गया और उसके बाद उसकी गाड़ी को घर के अंदर खड़ा करके में उसको बाय कहकर अपने घर आ गया, लेकिन अपने घर पर पहुंचकर भी में पूरी रात उसी की चुदाई के सपने देखता रहा। दोस्तों मुझे पता नहीं कब नींद आई और तब मैंने मन ही मन उसकी चुदाई करने का पूरा विचार बना लिया था, मुझे कैसे भी करके अब उसकी चुदाई जरुर करनी थी।

दोस्तों में दूसरे दिन बड़ा खुश होकर ठीक उसी समय पर उसके घर पर पहुंचा, जब में पिछले दिन पहुंचा था और फिर मैंने उसके पास पहुंचकर देखा कि आज उसने ट्राउज़र और बहुत टाईट एक टीशर्ट पहनी हुई थी जिसमे से उसके बूब्स का आकार उनकी गोलाई बिल्कुल साफ साफ दिखाई दे रही थी। अब मैंने महसूस किया कि आज उसने जानबूझ कर अंदर ब्रा भी नहीं पहनी थी, जिसकी वजह से उसकी टीशर्ट से मुझे उसकी निप्पल साफ नजर आ रही थी और मैंने भी उस दिन ट्राउज़र पहन रखा था। दोस्तों मैंने भी जानबूझ कर अपने ट्राउज़र के नीचे कुछ भी नहीं पहना था, जिसकी वजह से अच्छी तरह से मेरा लंड उसकी गांड को अंदर तक छु सके और मुझे पूरा पूरा मज़े मिले। फिर घर से कुछ दूरी तक उसकी स्कूटी को मैंने चलाया और बार बार ब्रेक लगाकर पीछे से में उसके बूब्स को अपनी कमर से टकरा रहा था, मुझे ऐसा करने में बहुत मज़ा आ रहा था। फिर वहीं पर जिस जगह मैंने उनको चलाना सीखाया था, वहां पर पहुंचकर मैंने उसको दूसरे दिन भी स्कूटी को चलाने के लिए दे दिया और अब में दोबारा कल की तरह उसके पीछे बैठ गया। अब तो उसको थोड़ा थोड़ा चलाना आ गया था और फिर जैसे ही उसने स्कूटी को चलाया मेरा लंड उसकी गांड में घुस गया। फिर पहली बार में ही मुझे छुकर पता चला कि उसने भी अंदर कुछ नहीं पहना।

अब मुझे उसकी हरकतों से महसूस होने लगा कि उसको भी अब मुझसे चुदाई करवाने का बहुत मन हो रहा है और उस बात को समझकर मेरी हिम्मत अब ज्यादा बढ़ गई और इसलिए मैंने अपने हाथ उसकी मोटी जाँघ पर रख दिए और धीरे धीरे एक हाथ मैंने उसकी चूत तक पहुंचा दिया। अब में उस पर हाथ फिरने लगा, लेकिन थोड़ी देर बाद उसने मेरा हाथ वहां से हटा लिया और में फिर से उसकी जाँघो पर हाथ फेरने लगा और धीरे धीरे उसकी चूत पर दोबारा पहुंच गया, लेकिन इस बार उसने ऐसा कुछ नहीं किया तो में अपनी एक उंगली को उसकी चूत के आसपास घूमाने लगा, वो हल्का सा मुस्कुरा रही थी। अब मैंने अपनी उस उंगली को चूत के ऊपर दबाना शुरू किया, तब मैंने महसूस किया कि उसकी वाह क्या मुलायम चूत थी? में तो लगातार अपनी उंगली को उसकी चूत पर रगड़ रहा था। तभी उसने कहा कि प्लीज थोड़ा धीरे रगड़ो मुझे कुछ हो रहा है, वरना मेरे हाथ से गाड़ी का यह हेंडल छुट जाएगा। दोस्तों उसके मुहं से यह शब्द सुनकर में बहुत चकित था और अब तो में पूरे जोश में आ गया था, क्योंकि मेरे मन से अब वो डर बिल्कुल खत्म हो चुका था।

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अब इसलिए में एकदम निडर होकर पीछे से उसके बूब्स को भी दबाने लगा था, वाह क्या मस्त मुलायम और बड़े आकार के बूब्स थे? इतने बड़े की वो मेरे हाथ में भी नहीं समा रहे थे, लेकिन थे बहुत मजेदार। अब मैंने सही और सुनसान जगह को देखकर उसकी टीशर्ट में अपना एक हाथ डाल दिया और अब में उसके बूब्स को दबाने और उसकी निप्पल पर मेरे अंगूठे को घूमने लगा ऐसा करने में मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। अब उसने अचानक से स्कूटी को रोक दिया, लेकिन में अभी भी उसकी एक निप्पल को अपनी उंगली और अंगूठे के बीच में रखकर मसल रहा था। अब वो खड़ी हो गये और में भी खड़ा हो गया, मेरे ट्राउज़र से मेरा लंड साफ नजर आ रहा था और वो मेरे खड़े लंड को बड़े ध्यान से देखती ही रह गयी। फिर मैंने उसको पूछा क्यों इस तरह से क्या देख रही हो? वो बोली कि तुम्हारा लंड तो ब्लूफिल्म में दिखाते है शायद उतना बड़ा लगता है? फिर मैंने उसको कहा कि नेहा चलो घर पर चलकर हम आज चुदाई करते है। अब नेहा ने कहा कि नहीं अमित को पता लगेगा तो बहुत बड़ी गड़बड़ हो जाएगी, में पहले अमित को इस काम के लिए मना लूंगी उसके बाद हम तीनो एक साथ मिलकर ब्लूफिल्म की तरह चुदाई करेंगे हमे यह सब मिलकर करने में बहुत मज़ा आएगा।

अब मैंने उसको कहा कि अमित कभी भी तुम्हारी इस बात को नहीं मानेगा, तब नेहा ने कहा कि में उसको जरुर मना सकती हूँ, क्योंकि उसको अपनी बातों में मुझे फंसाना बहुत अच्छी तरह से आता है और इसलिए मुझे पूरी तरह से विश्वास है कि वो मेरे इस काम के लिए कभी मना नहीं कर सकते। फिर दूसरे दिन का दिन रविवार था और उसी दिन दोपहर को जब में एक ब्लूफिल्म की सीडी देने उसके घर पर गया, तब मैंने देखा कि उस समय अमित घर पर ही था, उसने मुझसे वो सीडी ले ली और फिर उसने सीडी प्लेयर में उस सीडी को डालकर चालू कर दिया। अब मैंने देखा कि उस फिल्म में दो आदमी एक औरत की चुदाई कर रहे थे, में थोड़ा सा देखकर जैसे ही वहां से जाने के लिए खड़ा हुआ, तभी अमित ने मुझसे पूछा कि तुम्हे घर पर क्या कुछ काम है? थोड़ी देर यहीं हमारे साथ यह फिल्म देखो उसके बाद चले जाना। अब में उनके कहने पर एक बार फिर से नीचे बैठ गया और अब तक नेहा भी आ चुकी थी, उसने दरवाजा बंद किया और वो मेरे सामने देखकर मुस्कुराई और में भी मुस्कुराया उसके बाद वो भी हमारे साथ सोफे पर बैठ गयी। अब एक तरफ में बैठा था बीच में अमित और उसके पास नेहा बैठी हुई थी।

फिर जैसे जैसे वो फिल्म आगे बढ़ रही थी, अमित अब नेहा की जाँघो को सहला रहा था और नेहा का हाथ अमित के लंड पर था और कुछ देर बाद अमित ने नेहा के बूब्स को दबाना शुरू कर दिया। दोस्तों वो सब देखकर मेरा लंड तो जल्दी से टाइट हो गया और में उस समय बहुत जोश में आ चुका था। तभी अमित ने मेरे लंड की तरफ देखा और वो नेहा को मेरे लंड की तरफ इशारा करके कहने लगा, देखो इसका लंड तो कितना बड़ा है? अब नेहा भी मेरे लंड की तरफ देखने लगी और वो मेरी तरफ मुस्कुरा रही थी। अब अमित ने नेहा को हम दोनों के बीच में बैठने के लिए कहा और अब उसके कहते ही नेहा तुरंत उठकर हम दोनों के बीच में बैठ गई, जैसे उसको इस बात का ही इंतजार था और अमित उसके बूब्स दबा रहा था, मुझे तो अब देखते हुए ही कुछ कुछ हो रहा था और मुझसे रहा नहीं जा रहा था। तभी अमित ने मुझसे कहा कि तुम ऐसे क्यों बैठे हो आओ तुम भी दबाओ, में तो उसके मुहं से यह बात सुनकर जोश में आकर बूब्स पर टूट पड़ा और अब में नेहा का एक बूब्स अपने दोनों हाथों से दबाने लगा और उसके गुलाबी गुलाबी होंठो पर चुम्मा करने लगा। फिर उसके बाद में उसकी गर्दन पर चुम्मा करने लगा और उसकी निप्पल को अपने मुहं में लेकर चूसने लगा।

अब नेहा भी हम दोनों की वजह से पूरी तरह से मधहोश हो चुकी थी, उसने मेरी शर्ट और पेंट को उतार दिया और वो एक एक करके अपने कपड़े भी उतारने लगी और उसके बाद अमित ने भी अपने कपड़े उतार दिए। फिर उस समय मैंने देखा कि अमित का लंड मेरे लंड से आकार में बहुत छोटा था, उसका लंड करीब चार इंच का था, लेकिन नेहा और अमित तो मेरे लंड को घूर घूरकर देखते ही रह गये, क्योंकि मेरा लंड पूरा 6 इंच का और मोटा भी था। अब नेहा ने बिना देर किए नीचे झुककर वो मेरा लंड अपने हाथ में पकड़कर अपने मुहं में झट से लेकर चूसने लगी थी, जिसकी वजह से मुझे बहुत मस्त मज़ा आ रहा था और अमित पीछे से उसकी चूत में अपना लंड डालकर ज़ोर ज़ोर से धक्के लगा रहा था और कुछ देर धक्के देने के बाद अमित ने भी अब मेरा लंड चूसना शुरू किया। अब मैंने उसको पूछा क्या तुम्हे भी लंड चूसना अच्छा लगता है? तब वो बोला कि मुझे गांड मरवाना भी बहुत अच्छा लगता है और मैंने ही नेहा को बताया था कि मुझे एश से अपनी गांड मरवारनी है। दोस्तों लेकिन मैंने उसको यह भी कहा था कि मुझे लड़को की गांड मारना बिल्कुल भी पसंद नहीं है, क्योंकि मैंने ऐसा आज से पहले कभी किसी के साथ नहीं किया।

अब अमित मुझसे कहने लगा कि यार तू तो मेरा सबसे अच्छा दोस्त है क्या तू मेरा इतना सा कहना नहीं मानेगा और तुझे वैसे भी इस काम को करने के बाद आज नेहा की चुदाई भी करनी है। दोस्तों तब में उसकी इस बात को सुनकर और कुछ बात मन ही मन सोचकर उसकी बात के लिए मान गया मजबूरी में ही सही, लेकिन नेहा की चुदाई के लिए में वो सभी काम करने के लिए तैयार हो गया था। फिर नेहा हम दोनों के बीच से उठ गई, उसने तेल लाकर मेरे लंड पर बहुत सारा तेल लगाया जिसकी वजह से मेरा लंड बिल्कुल चिकना हो गया। अब उसके बाद नेहा ने थोड़ा सा तेल अमित की गांड पर भी लगा दिया और फिर उसने मेरा लंड अपने हाथ से पकड़कर अमित की गांड के छेद पर रख दिया, मैंने धक्का देकर अमित की गांड में अपने लंड का टोपा अंदर डाल दिया। फिर उसके बाद मैंने और ज़ोर से धक्का लगाया, जिसकी वजह से मेरा पूरा लंड अमित की गांड के अंदर चला गया। दोस्तों अब में पीछे से जोरदार धक्के लगाकर अमित की गांड मार रहा था और आगे से नेहा नीचे लेटकर अमित का लंड चूस रही थी। फिर थोड़ी देर के बाद अमित ने अपना सफेद पानी लंड से बाहर निकाल दिया जो सीधा नेहा के मुहं में चला गया, उसकी वजह से नेहा का मुहं पूरा भर गया मुहं से बाहर तक भी वीर्य टपकने लग और फिर वो हमारे बीच से हटकर दूसरे कमरे में चला गया।

अब उस वजह से में और नेहा उस समय एक साथ बिल्कुल अकेले थे और तुरंत ही नेहा सही मौका पाकर मेरे ऊपर चढ़ गयी, जिसकी वजह से मेरा लंड अब उसकी खुली हुई चूत के मुहं पर था। फिर वो अब मेरा लंड अपने एक हाथ से पकड़कर उसकी चूत में डालकर धीरे धीरे नीचे बैठने लगी और जब पूरा लंड अंदर तक जा पहुंचा तब वो धीरे धीरे ऊपर नीचे होने लगी और वो सिसकियाँ लेते हुए मुझसे कहने लगी उफ्फ्फ्फ्फ़ ऊईईईई माँ मर गई इतना मोटा लंड लेना शायद आह्ह्ह्हह मुझे ज्यादा दुखदाई हो गया आईईईईई शायद यह तो आज मेरी पूरी जान ही निकाल देगा, इतना दर्द मुझे मेरी पहली चुदाई के समय भी नहीं हुआ था, लेकिन तुम मेरे इस दर्द की परवाह बिल्कुल भी मत करना मुझे आज इसके पूरे मज़े तुम दे दो और मेरी इस आग को बुझा दो शांत कर दो मुझे, में वो पूरा मज़ा लेना चाहती हूँ। अब मैंने यह बात सुनकर पूरे जोश में आकर नेहा के बूब्स को पकड़कर में उसे ज़ोर ज़ोर से दबा रहा था और उसकी कमर को सहारा दे रहा था, लेकिन कुछ देर ऊपर नीचे उठने बैठने के बाद वो अब बहुत थक चुकी थी, जिसकी वजह से वो रुक गई। अब मैंने देखा कि इसकी सांसे बहुत तेज़ी से चल रही थी, जिसकी वजह से उसके बूब्स ऊपर नीचे हो रहे थे, वो सब देखना मुझे बहुत अच्छा लगा और उसका पूरा गोरा बदन अब तक पसीने से भीग चुका था।

दोस्तों अब मुझे, लेकिन उसके चेहरे से मुझे साफ साफ नजर आ रहा था कि उसमे अब भी मुझे चुदाई करवाने का जोश उतना ही था और उसने अभी भी अपनी तरफ से हार नहीं मानी थी। फिर मैंने ज्यादा देर ना करते हुए तुरंत उसको अपने नीचे लेटा दिया और अब में उसके ऊपर चढ़ गया और उसके बाद मैंने अपना लंड एक ही धक्के में उसकी चूत में पूरा अंदर डाल दिया और फिर में उसको धक्के लगाने लगा, लेकिन में अब हल्के हल्के धक्के देकर उसकी चुदाई भी कर रहा था, क्योंकि जो मज़ा हल्के धक्कों में चुदाई करने में आता है वो ज्यादा तेज में नहीं। अब  में उसके साथ बड़ी ही सेक्सी बातें भी कर रहा था, मैंने उसको कहा कि नेहा तुम्हारे बूब्स तो बड़े मुलायम और बड़े आकार के है। अब नेहा बोली कि तो ज़ोर से मसल दे, यह सब आज से तेरे ही है तू अब इनको अपना समझकर मेरे दोनों बूब्स को पूरा मसल डाल और आज तू इनका पूरा रस निचोड़ दे। फिर में उसके कहने पर अब ज्यादा ज़ोर ज़ोर से उसके दोनों बूब्स को मसलने दबाने लगा था और उसको बोलने लगा वाह मेरी रानी तुम तो बहुत कमाल की चीज़ हो तुम्हारी चिकनी चूत, गोल गोल बूब्स, पतली कमर, उभरी हुई गांड हर एक सेक्सी अंग तारीफ करने के लायक है तुम्हे तो जितना चोदो जितनी भी बार चोदो सब कम है तुम बहुत सेक्सी माल हो।

फिर वो बोली कि ऊऊईईईई आह्ह्ह्हह्ह हाँ थोड़ा और ज़ोर से धक्के लगाओ उहह्ह्ह्हह हाँ पूरा अंदर तक डाल दो और जाने दो अंदर तक वाह मुझे बहुत मस्त मज़ा आ रहा है और उसकी वो जोश भरी बातें सुनकर में बड़े मज़े से तेज गति से धक्के देकर उसकी चुदाई करने लगा था। दोस्तों तब मैंने महसूस किया कि मेरे लंबे मोटे लंड से उसकी जमकर चुदाई होने की वजह से नेहा को अब दर्द के साथ साथ अब तक वो मज़ा वो संतुष्टि मिल चुकी थी जिसके लिए वो अब तक तरस रही थी। दोस्तों करीब एक घंटे तक लगातार मैंने हर एक अलग अलग तरह से उसकी चुदाई के मज़े लिए और मैंने कभी उसकी चूत में अपना लंड डाला तो कभी गांड में कभी दोनों बूब्स के बीच की दरार में अपने लंड को डालकर धक्के दिए। फिर उसके बाद आखरी में मैंने उसके मुहं में अपना सारा वीर्य निकाल दिया जो उसके मुहं में भरकर बाहर निकलकर उसके बूब्स पर टपकने लगा, मैंने उस वीर्य से उसके बूब्स की मालिश करना शुरू किया। अब वो मुझसे कहने लगी कि वाह तुम तो बड़े अच्छे तरह से यह काम करते हो, मैंने तो तुम्हे अनाड़ी समझा, लेकिन तुम तो इस काम के बहुत अच्छे खिलाड़ी निकले तुमने आज मुझे वो मज़ा वो सुख दिया है जिसको में बहुत दिनों से पाना चाहती थी और अब तुम आज के बाद मेरी हमेशा ऐसे ही चुदाई करोगे मुझे चुदाई का असली मज़ा हमेशा ऐसे ही दोगे।

दोस्तों उसके बाद में अपने कपड़े पहनकर करीब एक घंटा उसके गोरे सेक्सी बदन से खेलकर अपने घर आ गया, लेकिन उसके बाद में हर रविवार को उसकी बहुत जमकर चुदाई करने लगा। फिर इस तरह मैंने उसको बहुत बार चोदा मुझे उसकी चुदाई करने में मुझे बहुत मज़ा एक अजीब सा सुख मिलता था और वो भी मेरी चुदाई से हमेशा संतुष्ट हुई। दोस्तों हमारी वो चुदाई थोड़ा कम समय चली, क्योंकि अभी एक महीने पहले ही अमित का तबादला मुंबई हो गया और वो दोनों पति-पत्नी मुझसे अपनी आखरी चुदाई के बाद विदाई लेकर चले गये। अब सिर्फ मेरे पास अमित और नेहा के फोन आते है में उनसे बहुत सारी बातें करता हूँ, लेकिन अब भी वो मुझे चुदाई करने वहां पर अपने पास बुलाते है और में भी इस बार मेरी आने वाली छुट्टियों में शायद वहां पर जरुर जाऊंगा और उन दोनों के साथ दोबारा वो मज़े लूँगा जिसके लिए वो मुझे अपने पास बुला रहे है।

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क्यों दोस्तों कैसी लगी आप सभी को मेरी यह कहानी? में उम्मीद करता हूँ कि आप सभी के मन को जरुर भा जाएगी।

धन्यवाद …

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